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मोदी सरकार जल्द करेगी ऐलान, इन अकाउंट में हर महीने आएंगे 2000 से 2500

तीन राज्यों में चुनाव हारने के बाद बीजेपी को सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और युवाओं की नाराजगी की है। इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रियों के साथ बैठक कर इस नाराजगी को दूर

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 दिसंबर): तीन राज्यों में चुनाव हारने के बाद बीजेपी को सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और युवाओं की नाराजगी की है। इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रियों के साथ बैठक कर इस नाराजगी को दूर करने का उपाय निकालने में लगे हैं। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से इस बारे में कोई स्‍पष्‍ट बात सामने नहीं आई है कि वह नाराज किसान और युवाओं को किस तरह मनाएंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले एक ऐसी योजना लाने की तैयारी कर रही है, जो चुनाव के दौरान 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार की यह योजना किसानों की कर्जमाफी वाली योजना से भी दो कदम आगे हैं। इस स्कीम को UBI यानी Universal Basic Income स्कीम माना जा रहा है। इस स्कीम के दायरे में देश के सभी नागरिक आएंगे, इनमें किसान, व्यापारी और बेरोजगार युवा भी शामिल होंगे। इस योजना के तहत देश के हर नागरिक को 2,000 से 2,500 रुपये तक हर महीने दिए जा सकते हैं। जिन लोगों के पास आय का कोई साधन नहीं है सरकार उन सभी नागरिकों के बैंक खातों में एक तयशुदा रकम सीधा ट्रांसफर करेगी।

सरकार किसानों के लिए सरकार एक अलग स्कीम लाने पर भी विचार कर रही है, जिसके तहत कम कीमत पर फसल बेचने वाले किसानों के नुकसान की भरपाई की जाएगी। नुकसान की भरपाई के लिए जो भी रकम दी जाएगी, वो सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

खाते में कैसे आएगा पैसा?

यूनिवर्सल बेसिक इनकम योजना को लागू करने के लिए आधार नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा। योजना में शामिल होने वाले नागरिक के बैंक खाते को आधार नंबर से लिंक किया जाएगा और फिर सरकार की ओर से दिए जाने वाले पैसे को सीधे उसके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

लंदन के एक प्रोफेसर का था आइडिया

यूबीआई का सुझाव सबसे पहले लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने दिया था जिनकी अगुवाई में मध्य प्रदेश के इंदौर के पास 8 गांवों में पांच साल के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। ट्रायल के तौर पर इन गांवों की 6,000 की आबादी के बीच 2010 से 2016 के बीच इस प्रोजेक्ट को चलाया गया। फिर 500 रुपये गांव वालों के बैंक खाते में हर महीने डाले गए, वहीं बच्चों के खाते में 150 रुपये जमा कराए गए. इससे लोगों को काफी फायदा हुआ।

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