13 प्वाइंट रोस्टर पर अध्यादेश लाने की तैयारी में मोदी सरकार, जानें क्या है पूरा विवाद

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (5 मार्च): 13 सूत्रीय रोस्टर पर मचे विवाद के बीच सरकार इस पर अध्यादेश लाने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि मोदी सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक में सात तारीख़ को इस पर फैसला हो सकता है। इसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी को विश्वविद्यालयों में फ़ैकल्टी में भर्ती के लिए आरक्षण डिपार्टमेंट के बजाए यूनिवर्सिटी के आधार पर दिया जाएगा। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2017 के फ़ैसले को बहाल रखा था, जिसमें आरक्षित पदों को भरने के लिए डिपार्टमेंट को यूनिट माना गया था न कि यूनीवर्सिटी को। इस मामले में सरकार की रिव्यू पीटिशन को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

उच्च श‍िक्षण संस्थानों में 13 पॉइंट रोस्टर वाले आरक्षण की नई व्यवस्था के विरोध में मंगलवार यानी आज कई संगठनों ने भारत बंद आयोजित किया है। कल यानी 6 मार्च, बुधवार को कैबिनेट की अंतिम बैठक है, क्योंकि इसके बाद लोकसभा चुनाव की घोषणा होनी है। इससे पहले ही पीएम मोदी को इस मसले पर निर्णय लेना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी, 2019 के आदेश को पलटते हुए अध्यादेश लाया जाए या नहीं। सूत्रों के मुताबिक इस बारे में सरकार एक अध्यादेश ला सकती है कि विश्वविद्यालओं में विभागवार की जगह संस्थान वार आरक्षण लागू किया जाए। अंतिम कैबिनेट बैठक में सरकार कई महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है। इस बैठक में ही सरकार उच्च शिक्षण संस्थाओं में सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण प्रदान करने के लिए 10 फीसदी आरक्षण को लागू करने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्ति फंड आवंटित कर सकती है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक यूजीसी ने सर्कुलर जारी कर सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में विभागवार की जगह संस्थान वार आरक्षण लागू करने का आदेश दिया था। इस सर्कुलर से एसएसी/एसटी और ओबीसी वर्ग में गुस्सा बढ़ने लगा। गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत से इस बारे में एक बिल तैयार करने को कहा और दिसंबर तक उन्होंने 'केंद्रीय शिक्षण संस्थान सीधी भर्ती बिल' तैयार भी कर लिया। लेकिन यह बिल ठंडे बस्ते में ही रहा। आरक्षण के मसले पर सवर्णों की नाराजगी को देखते हुए सरकार ने इस साल जनवरी में सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण का बिल भी पारित करा लिया। दलित और पिछड़े वर्ग में आरक्षण की नई व्यवस्था को लेकर काफी गुस्सा है और वे सरकार से इस मामले में तत्काल एक्शन चाहते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था में दलित-पिछड़ों की भर्ती में 50 फीसदी तक की गिरावट आई है।