दिल के मरीजों को राहत, स्टेंट के लिए 30 हजार रूपए से ज्यादा नहीं लेंगे अस्पताल

नई दिल्ली ( 14 फरवरी ): केंद्र सरकार ने मुनाफाखोरी पर अमादा अस्पतालों और दवा कंपनियों पर नकेल कसते हुए एंजियोप्लास्टी के दौरान लगाए जाने वाले स्टेंट की कीमत तय कर दी है। राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा है कि कोई भी अस्पताल या दवा कंपनी विदेश से मंगाए जाने वाले  स्टेंट के लिए 30 हजार रूपए से ज्यादा की रकम नहीं वसूलेंगे। दिल के मरीजों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कोरोनरी स्टेंट की कीमतों में 85 फीसदी तक की कमी की है। अब इसके हिसाब से मेटल के स्टेंट 7,260 रुपये में और ड्रग इल्यूट स्टेंट की कीमत 29,600 रुपये होगी।

नेशनल फार्मासूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इस बात की जानकारी दी कि जनता के हित में यह फैसला लिया गया है जिसके तहत स्टेंट की कीमतें सरकार ने तय कर दी है। स्टेंट का काम किसी मरीज की धमनी को चालू रखने के लिए किया जाता है। जिस धमनी में रुकावट होती है, उसे स्टेंट डालकर खोला जाता है जिससे खून का बहाव बिना रुकावट चलता रहता है। इसकी सबसे ज्यादा जरूरत बाईपास सर्जरी और किडनी से जुड़ी समस्याओं में पड़ती है।

मौजूदा समय में स्टेंट की कीमत 25 हजार रूपये से लेकर 2 लाख रुपये तक है। NPPA पर मौजूद डेटा के मुताबिक हॉस्पिटल्स स्टेंट में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाते हैं जिसमें उनका मार्जिन करीब 654 प्रतिशत तक होता है।

NPPA ने अपने इस फैसले के पीछे कुछ कारण भी बताए। इसके मुताबिक, यह देखा गया कि कोरोनरी स्टेंट के सप्लाई चेन में अलग-अलग स्टेज पर अनैतिक तरीके से कीमत बढ़ायी जा रही है। डॉक्टरों और मरीजों के बीच जानकारी की विषमता होने की वजह से मरीजों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

इस तरह की परिस्थितियों को देखते हुए जनता के हित में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि कोरोनरी स्टेंट की कीमत फिक्स कर दी जाए ताकि मरीजों को कुछ राहत मिल सके। सरकार ने कोरोनरी स्टेंट को जुलाई 2016 में आवश्यक दवाओं की नोशनल लिस्ट 2015 में शामिल किया जबकि दिसंबर 2016 में इसे ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 में शामिल किया गया।

पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टेंट के लिए मनमाना पैसा वसूलने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने इसे जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची में शामिल कर लिया था।

दूसरी ओर अस्पताल और दवा कंपनियां स्टेंट को दवा मूल्य नियंत्रण सूची में रखने का विरोध कर रही थी। लेकिन जांच में पाया गया कि कुछ अस्पताल स्टेंट को अपनी कमाई के अहम स्रोतों में शामिल करते हैं। इस लिहाज से सरकार के फैसले से दिल के मरीजों को बड़ी राहत मिली है।