Blog single photo

मोदी सरकार का बड़ा प्लान, अब ग्रेजुएशन के दौरान ही मिलेगी नौकरी

मोदी सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है। युवा सरकार से नाराज है, क्योंकि उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। इसी नाराजगी को दूर करने के लिए मोदी सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय

Photo: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 दिसंबर): मोदी सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है। युवा सरकार से नाराज है, क्योंकि उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। इसी नाराजगी को दूर करने के लिए मोदी सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने संयुक्त रूप से एक बड़ा प्लान तैयार किया है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मुहैया कराना है।

एक अखबार के प्रकाशित खबर के अनुसार, मोदी सरकार बड़े पैमाने पर अपरेंटिस प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। यह प्रोग्राम खासकर गैर-तकनीकी छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, ताकि ग्रेजुएशन पूरी होने पर उनके अंदर एक हुनर पैदा हो जाए और वे एक अच्छी नौकरी के लिए खुद को तैयार कर पाएं। यह अपरेंटिस प्रोग्राम 6 से 10 महीने के अवधि का होगा। इसके तहत विभिन्न कंपनियों द्वारा अंडर ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं को अपरेंटिस पर रखा जाएगा। अपरेंटिस के द्वारा उन्हें स्टाइपंड भी दिया जाएगा। यह अपरेंटिस प्रोग्राम ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, ताकि जब वे कॉलेज से बाहर आएं तो ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ-साथ उनके हाथ में एक नौकरी भी हो।

टेक्निकल कोर्स वाले छात्रों पर कंपनियां खुद ही यूनिवर्सिटी और कॉलेजों पर नजर रखती हैं और कैंपस प्लेसमेंट के जरिए तकनीकी शिक्षा वाले छात्रों को नौकरी मिल जाती है। असल समस्या तो गैर-तकनीकी छात्र-छात्राओं के सामने आती है। इस समस्या को देखते हुए सरकार के तीनों मंत्रालय उद्योग जगत के साथ मिलकर हाई-क्लाविटी एपरेंटिस और बेसिक ट्रेनिंग का एक प्रोग्राम तैयार करवा रहे हैं।

तीनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले दिनों इस मुद्दे को लेकर एक बैठक भी थी और नॉन टेक्निकल स्टूडेंट्स के लिए अपरेंटिस प्रोग्राम शुरू करने पर चर्चा की थी। इस प्रोग्राम को अगले साल से शुरु कर दिया जाएगा और शुरूआती चरण में इससे लगभग 10 लाख छात्र-छात्राओं को जोड़ा जाएगा। इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर चलाने की तैयारी है और इसे इंटीग्रेटेड अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम से जोड़ा जाएगा।

राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के लिए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ का बजट रखा गया है। कोई ठोस योजना नहीं होने के कारण इस समूचे बजट का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। नए प्लान के तहत अप्रेंटिस के लिए रखे गए प्रत्येक स्टूडेंट को मिलने वाले स्टाइपंड का 25 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती है।

Tags :

NEXT STORY
Top