रियल एस्टेट कानून में बदलाव की तैयारी में मोदी सरकार, ये होगा असर...

नई दिल्ली (19 जून): केंद्र सरकार रियल एस्टेट कानून में कुछ बदलाव की तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि ये बदलाव ऐसे लोगों को ध्यान में रख कर किए जा रहे हैं जिन्हें घर खरीदते या किराए पर लेते समय भेदभाव या अटपटे सवालों का सामना करना पड़ता है। नए नियमों को लागू होने के बाद न तो लोगों से अटपटे सवाल पूछे जा सकेंगे और न ही उन्हें जाति, धर्म, भाषा और खानपान के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ेगा। 

घर बेचते समय या किराये पर देते समय अक्सर बिल्डर या डवलपर ये पूछते हुए पाए जाते हैं कि आप वेज हैं या नॉनवेज, किस धर्म के हैं। लेकिन अब बायर्स को ऐसे सवालों से दो-चार नहीं होना पड़ेगा। बायर्स को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार रियल एस्टेट एक्ट में कई परिवर्तन की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक रियल एस्टेट एक्ट में कुछ नई धाराएं शामिल की जा रही हैं। नई धाराओं में बायर्स से धार्मिक, लैंगिक या खानपान के आधार पर भेदभाव की मनाही होगी। एक नियामक और ट्राइब्यूनल ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण रखेगा। नियम का उल्लंघन पर होने नियामक या ट्राइब्यूनल सुनवाई भी करेंगे। अगर बिल्डर दोषी पाया गया तो 3 साल की सज़ा का प्रावधान होगा। 31 अक्टूबर से पहले नए नियमों को लागू करने की योजना है।

उम्मीद का जा रही है कि रियल एस्टेट कानून में प्रस्तावित नई धाराएं जुड़ने से ऐसी घटनाएं नहीं हो पाएंगी। देश के संविधान में धर्म, जाति, भाषा, लिंग के आधार पर भेदभाव की मनाही है। इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। नई धाराओं को संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रख कर  ही तैयार किया गया है।

नए प्रावधानों का मकसद बायर्स को भेदभाव से बचाना है। सरकार का ये कदम उन लोगों के राहत की बात है जिन्हें भेदभाव झेलना पड़ता है और घर के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है।