यूनिफॉर्म सिविल कोड पर केंद्र ने लॉ कमीशन से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली(1 जुलाई): मोदी सरकार ने लॉ कमीशन को यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए सभी पहलुओं की जांच करने को कहा है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी सरकार ने लॉ कमीशन को ऐसा करने के लिए कहा है। बता दें कि देश में यह मामला पहली बार 1840 में उठा था।

लॉ कमिशन की अगुवाई अभी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस बलबीर सिंह चौहान कर रहे हैं। मोदी सरकार ने कमीशन से इससे रिलेटेड सभी पहलुओं की जांच करने को कहा है। लॉ मिनिस्ट्री ने कमीशन से इस सिलसिले में हुए फैंसलों से जुड़े डॉक्यूमेट्स की भी मांग की है।

एक अफसर के मुताबिक, कमीशन सभी एक्सपटर्स और स्टॉकहोल्डर के साथ से बातचीत करने के बाद रिपोर्ट सबमिट करेगा।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड

- यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब देश के सभी नागरिकों के लिए एक तरह का पर्सनल लॉ होगा।

- संविधान के ऑर्टीकल 44 के मुताबिक, यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करना राज्य की डयूटी है।

- अभी हिंदू और मुसलमानों के लिए अलग-आग पर्सनल लॉ हैं। इसमें प्रॉपर्टी, शादी, तलाक, वारिस जैसे मामले आते हैं।

- 1985 में शाह बानो केस के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड एक बार फिर सुर्खियों में आया। 

- सुप्रीम कोर्ट ने बानो के पूर्व पति को गुजारा भत्ता देने का ऑर्डर दिया था।

- इसी मामले में कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पर्सनल लॉ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना चाहिए।

- राजीव गांधी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए संसद में एक विवादास्पद कानून पेश किया था।