दुनिया का दूसरा सबसे बड़े बांध है सरदार सरोवर, 3 राज्यों को होगा ये फायदा

नई दिल्ली (18 सितंबर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार सरोवर बांध को राष्‍ट्र को समर्पित किया। इस बांध से तीन राज्‍यों गुजरात, मध्‍य प्रदेश और महाराष्‍ट्र के लोगों को सबसे ज्‍यादा फायदा होगा। 56 साल पहले तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा 5 अप्रैल 1961 को नर्मदा जिले के केवादिया में इस बांध की आधारशिला रखी गई थी। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।

इस बांध को तैयार करने में लगभग 65,000 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस बांध की मदद से गुजरात में 18 लाख हेक्‍टेयर और राजस्‍थान में 2.46 लाख हेक्‍टेयर जमीन पर सिंचाई की जा सकेगी। इस बांध का लक्ष्‍य 10 लाख किसानों को फायदा पहुंचाना है। बांध में स्‍थापित की गई टर्बाइन के माध्‍यम से पैदा होने वाली बिजली मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र और गुजरात को दी जाएगी।

इसके दरवाजे बंद करने के बाद बांध की ऊंचाई बढा़कर 138 मीटर की गई, जिससे इसकी भंडारण क्षमता 12.7 लाख क्यूबिक मीटर से बढ़कर 47.3 लाख क्यूबिक मीटर (एमसीएम) हो गई। पहले इस बांध की ऊंचाई 121.92 मीटर थी। सरदार सरोवर बांध की अवधारणा सरदार वल्‍लभभाई पटेल ने तैयार की थी, इसलिए इस परियोजना को उनका नाम दिया गया है। इसका नाम बदलने से पहले इसे नवागम बांध के नाम से जाना जाता था। पंडित नेहरू द्वारा 1961 में इस परियोजना की आधारशिला रखी गई, लेकिन फरवरी 1980 तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका। इसका कारण पर्यावरण और खाली कराए गए गांवों के पुर्नस्‍थापना से जुड़े मुद्दे थे।

विभिन्‍न प्राधिकारों से मंजूरियां मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन मई 2014 तक 121.92 मीटर की ऊंचाई पर आकर इसका काम फि‍र रूक गया। जून 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने राज्‍य सरकार की आठ साल पुरानी उस याचिका को मंजूरी दे दी, जिसमें सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ाने की मंजूरी मांगी गई थी।