चुनावी वादों को हकीकत बनाने में मोदी के छूट रहे पसीने, अब भिड़ा रहे ये जुगत

 न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई (5 जून):  चुनावी वादों को हकीकत में बदलने  की कोशिशों में मोदी सरकार के पसीने छूटने लगे हैं। मोदी के सामने सबसे बड़ी समस्या रोजगार और देश के विकास की गति को बढाना है। इन दोनों मोर्चों पर सरकार को जुटाने के लिए मोदी ने बुधवार को दो महत्वपूर्ण कमेटियों का गठन किया है जिनकी जिम्मेदारी ऐसी नीतियां बनाना है जिनसे रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।  पहली कमेटी निवेश और विकास (इन्वेस्टमेंट ऐंड ग्रोथ) के लिए बनायी गयी है। इस पांच सदस्यीय कैबिनेट कमिटी में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा एमएसएमई मिनिस्टर नितिन गडकरी के साथ-साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल शामिल हैं।

दूसरी कमेटी रोजगार एवं कौशल विकास (एंप्लॉयमेंट ऐंड स्किल डिवेलपमेंट) के लिए बनायी गयी है। इसमें  चेयरमैन समेत 10 सदस्य हैं। शाह, सीतारमण और गोयल को इस समिति में भी शामिल किया गया है। इनके अलावा, कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, कौशल विकास एवं आंट्रप्रन्योरशिप मंत्री महेंद्र नाथ पाण्डेय के साथ-साथ श्रम राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार एवं आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी इस समिति के सदस्य हैं।

 

नई सरकार के सामने अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 5.8 प्रतिशत पर आ गिरा। वहीं, पूरे वित्त वर्ष की आर्थिक विकास दर 6.8 प्रतिशत पर गिर गया है जो पिछले पांच साल का निचला स्तर है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 7.2 प्रतिशत के जीडीपी ग्रोथ रेट का लक्ष्य रखा गया था जो 0.04% से पिछड़ गया।

इसी तरह, रोजगार सृजन को लेकर आए आंकड़ों ने भी सरकार को चिंता में डाला है। 30 मई को मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद ही पेरयॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) ऐनुअल रिपोर्ट (जुलाई 2017 से जुलाई 2018) जारी किया गया। सरकार की ओर से जारी इस रिपोर्ट में देश में 6.1 प्रतिशत बोरोजगारी दर होने की बात कही गई जो पिछले 45 वर्षों में सबसे ज्यादा है।

Images Courtesy:Google