अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश

नई दिल्‍ली (24 जनवरी): केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई।

केंद्र की सिफारिश के बाद राजनीति का दौर भी शुरू हो गया है। राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस ने इसे बहुमत का उपहास, संघीय ढांचे का दमन बताया है। वहीं, दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ट्वीट किया, 'अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना हैरान करने वाला कदम है। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले लिया गया यह फैसला संविधान की हत्या है। बीजेपी चुनाव हार गई है इसलिए पिछले दरवाजे से सत्ता हासिल करना चाहती है।

इस राज्य में पिछले साल 16 दिसंबर को राजनीतिक संकट शुरू हो गया था जब कांग्रेस के 21 बागी विधायकों ने बीजेपी के 11 सदस्यों और दो निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर एक अस्थायी स्थान पर आयोजित सत्र में विधानसभा अध्यक्ष नबाम रेबिया पर ‘महाभियोग’ चलाया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस कदम को ‘अवैध और असंवैधानिक’ बताया था।

कांग्रेसी मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ जाते हुए पार्टी के बागी 21 विधायकों ने बीजेपी और निर्दलीय विधायकों की मदद से एक सामुदायिक केंद्र में सत्र आयोजित किया। इनमें 14 सदस्य वे भी थे जिन्हें एक दिन पहले ही अयोग्य करार दिया गया था। राज्य विधानसभा परिसर को स्थानीय प्रशासन द्वारा ‘सील’ किए जाने के बाद इन सदस्यों ने सामुदायिक केंद्र में उपाध्यक्ष टी नोरबू थांगडोक की अध्यक्षता में तत्काल एक सत्र बुलाकर रेबिया पर महाभियोग चलाया।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्रियों समेत 60 सदस्यीय विधानसभा में 27 विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया था। एक दिन बाद विपक्षी बीजेपी और बागी कांग्रेसी विधायकों ने एक स्थानीय होटल में मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ मतदान किया और कांग्रेस के एक असंतुष्ट विधायक को उनकी जगह चुनने का फैसला किया लेकिन गोहाटी उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए बागियों के सत्र में लिये गये फैसलों पर रोक लगा दी।