चीन-नेपाल के सैन्य अभ्यास से भारत परेशान

नई दिल्ली ( 27 दिसंबर ): भारत और चीन के साथ नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल भले ही संबंधों को संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हों लेकिन हाल ही में काठमांडू की ओर से प्रस्तावित चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास भारत को बेचैन कर रहा है। 'प्रतिकार' नाम का यह सैन्य अभ्यास अगले साल होना है।

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के कार्यकाल के दौरान भारत-नेपाल के संबंधों में तनाव बढ़ा था, लेकिन पुष्प कमल दहल के पीएम पद संभालने के बाद दोनों देशों ने रिश्तों को फिर से सुधारने की ओर कदम बढ़ाए हैं। हालांकि इसके बावजूद भारत को नेपाल-चीन की करीबी रास नहीं आ रही है।

भारत में नेपाल के राजदूत दीप उपाध्याय ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह अभ्यास बहुत छोटे स्तर पर किया जा रहा है और इसमें भारत को चिंता करने की जरूरत नहीं है। यह अभ्यास नेपाल को आतंक विरोधी ऑपरेशन्स में मदद के मकसद से किया जाएगा। हालांकि भारत बीते एक दशक से नेपाल के साथ ऐसे सैन्य अभ्यास करता रहा है लेकिन नेपाल और चीन के बीच इस तरह के अभ्यास की पहल इन दोनों ही देशों के साथ भारत के रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत और नेपाल के बीच रक्षा समझौतों के तहत मिलिटरी एजुकेशनल एक्सचेंज, संयुक्त अभ्यास और सैन्य उपकरणों की सप्लाई का सौदा है। इतना ही नहीं बल्कि 32 हजार नेपाली गोरखा आज भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं नेपाल में भारत के 1.2 लाख पूर्व सैनिक और उनके परिवारवाले रह रहे हैं जो भारत से पेंशन लेते हैं।

नेपाल और चीन के बीच प्रस्तावित सैन्य अभ्यास की खबर भारत के सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग के काठमांडू दौरे के एक महीने बाद ही आ गई है। जनरल सुहाग का दौरा दोनों देशों के रिश्तों के तनाव को कम करने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

नेपाल के साथ सैन्य संबंधों में सुधार होने पर चीन ने भी भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सोमावार को चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' में छपे एक लेख में भारत को चेतावनी भरे लहजे में कहा गया है कि, 'भारत हमेशा नेपाल का इस्तेमाल अपने बैकयार्ड के तौर पर करे यह न तो व्यवहारिक है और न ही संभव। चीन-नेपाल के बीच बढ़ते सहयोग पर भारत दबाव नहीं बना सकता है।'