तुर्की में फंसे 186 भारतीय, आर्मी पर भारी आवाम

अंकारा (16 जुलाई): तुर्की में तख्तापलट की आर्मी की कोशिशों पर वहां की आवाम भारी पड़ी है। दोनों तरफ से दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबर है, लेकिन इसी बीच एक जानकारी यह भी निकलकर आई है कि तुर्की में स्पोर्ट्स इवेन्ट के लिए गए करीब 200 इंडियन स्टूडेंट्स फंसे हुए हैं।

तख्तापलट नाकाम करने में जनता का बड़ा रोल: - आर्मी ने सत्ता पर कब्जा कर मार्शल लॉ लागू करने का दावा किया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद प्रेसिडेंट रैचेप तैयाप एर्दोआन सामने आए और कहा कि देश की कमान उन्हीं के पास है। - उन्होंने कहा, "मैं देश की जनता से सड़कों पर उतरने का आह्वान कर रहा हूं। आओ, इन्हें सबक सीखाएं।" - इस अपील के बाद लोग विद्रोही सेना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए और भारी विरोध करने लगे। - लोग टैंकों के सामने लेट गए। कई इमारतों में कब्जा किए बैठे आर्मी के जवानों को लोगों ने घसीटकर बाहर कर दिया। - उधर, तुर्की के प्रेसिडेंट को एक स्पेशल प्लेन से सेफ लोकेशन पर पहुंचा दिया गया। - इससे पहले विद्रोही सेना ने अंकारा में पार्लियामेंट पर बमबारी भी की। आम लोगों पर भी गोलियां बरसाई गईं।

तुर्की में बगावत और सेना-सरकार में टकराव की वजह क्या है ? - प्रेसिडेंट की एके पार्टी 2002 में सत्ता में आई। इसके बाद से प्रेसिडेंट अपने पास ही सारे अधिकार रखने की कोशिश में हैं। उन्होंने फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन पर भी बंदिशें लगाई हैं। - सत्ता में आते ही प्रेसिडेंट ने ही कई आर्मी अफसरों पर मुकदमे चलाए। इससे आर्मी में असंतोष बढ़ा। - एके पार्टी के नेतृत्व में देश का इस्लाम की तरफ झुकाव बढ़ा है। 2002 में तुर्की के मदरसों में तालिम लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 65 हजार थी। अब 10 लाख हैं। - तुर्की में सेना पूरी तरह सेक्युलर डेमोक्रेसी की समर्थक रही है। वह सरकार की इस्लामी सोच का विरोध करती है।