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मिड डे मील में अब जेल का खाना खाएंगे सरकारी स्कूल के बच्चे !

केंद्र सरकार सरकारी स्कूलों मं परोसे जाने वाले मिड डे मील के लिए जेल की बनीं रोटियों का इंतजाम कर रही है। सिर्फ रोटी ही नहीं, दाल-चावल भी जेल से ही बनाकर भेजा जाएगा। चंडीगढ़ में तो आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चे फिलहाल जेल का ही बना एमडीएम खा रहे हैं।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 जनवरी): केंद्र सरकार सरकारी स्कूलों मं परोसे जाने वाले मिड डे मील के लिए जेल की बनीं रोटियों का इंतजाम कर रही है। सिर्फ रोटी ही नहीं, दाल-चावल भी जेल से ही बनाकर भेजा जाएगा। चंडीगढ़ में तो आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चे फिलहाल जेल का ही बना एमडीएम खा रहे हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर कहा है कि वह अपने राज्य से यह रिपोर्ट बनाकर भेजें कि प्राइमरी और जूनियर क्लास के बच्चों को जेल का बना एमडीएम कैसे खिलाया जा सकता है और इसके लिए क्या-क्या तैयारी करनी होगी। नगर क्षेत्र और गांव के स्कूलों की जेल से दूरी कितनी है। वाहन के जरिए जेल से खाना भेजने में कितना वक्त लगेगा। इसके लिए क्या इंतजाम करने होंगे।

इस तरह का सर्वे देश के हर राज्य में हो रहा है। अभी स्कूलों में कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ दो वर्गों में बच्चों को मिड डे मील खिलाया जाता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत सभी सरकारी स्कूल, सहायता प्राप्त स्कूल और मदरसा आते हैं। नगर क्षेत्र में पूरी तरह से एनजीओ एमडीएम सप्लाई करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में प्रधान और हेडमास्टर मिलकर एमडीएम बनवाते हैं। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में भी एनजीओ खाना सप्लाई करते हैं।

एमडीएम एक नजर में (रोजाना का खर्च)

-2.41 करोड़ का गेहूं-चावल.

-50 करोड़ रुपये का तड़का लगता है.

रसोइयों का वेतन हर रोज 84 करोड़.

-एमडीएम बनाने वाले रसोइयों की संख्या 25.38 लाख.

-रसोइयों का वेतन- एक हजार रुपये प्रति महीना.

- एमडीएम के लिए सरकार देती है 2 रुपये किलो गेहूं, 3 रुपये चावल.

- स्कूलों में 8172 करोड़ की लागत से बने है रसोइघर.

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