मेक्सिको में जागा ज्वालामुखी, राख और धुएं में ढका शहर

मेक्सिको (20 अप्रैल): 22 साल के बाद मेक्सिको में एक ज्वालामुखी फिर से जागा है। इस ज्वालामुखी से राख और आग निकल रही है। ज्वालामुखी से निकला लावा इस तेजी से आसपास फैल रहा है कि लोगों को ज्वालामुखी से कम से कम 12 किलोमीटर दूर रहने को कहा गया है।

रात के अंधेरे में जब मेक्सिको के सबसे बड़े ज्वालामुखी में एक पोपो कैट पेल ज्वालामुखी फटा तो तेज धमाके से धरती डोलने लगी। हालांकि इस ज्वालामुखी में पिछले कई दिनों से भारी हलचल देखने को मिल रही थी। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने मेक्सिको के आसपास रह रहे लोगों को चेतावनी जारी कर सतर्क रहने के लिए कहा था।

मेक्सिको के प्यूबला शहर में जिस वक्त ये ज्वालामुखी फटा उस वक्त आधी रात से ज्यादा का वक्त हो रहा था। लोग घरों में सो रहे थे, तभी पोपो कैट पेल ज्वालामुखी ने कहर बरपाना शुरू किया। ज्वालामुखी में धमाके के बाद राख निकली और फिर गर्म लावा रास्ते में आने वाली हर चीज को निगलने लगा। सुबह जब लोगों ने शहर का नजारा देखा तो आंखों को यकिन नहीं हुआ। सारा शहर धूल और धुंए के गुबार में समा चुका था।

ज्वालामुखी से निकले राख और धूल के गुबार ने सारे शहर को घेर लिया। सड़क इमारतों और गाड़ियों पर धूल और राख की मोटी परत जमा हो गई। ज्वालामुखी के स्क्रीय होने के बाद शहर के एक मात्र एयरपोर्ट को भी बंद करना पड़ा ताकि एयरपोर्ट को किसी संभावित खतरे से बचाया जा सके। रनवे और जहाजों पर राख जमा हो जाने की वजह से एयरपोर्ट को अगले तीन दिनों तक बंद कर दिया गया है। ज्वालामुखी धमाका और हवा में प्रदूषण की वजह से अधिकारियों ने येलो अलर्ट जारी किया है ताकि लोगों को खतरे के प्रति आगाह किया जा सके।

अधिकारियों ने लोगों से मॉस्क पहनने को कहा है ताकि उन्हें सांस लेने में किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े। लोगों को इस ज्वालामुखी से कम से कम 12 किलोमीटर दूर रहने को कहा गया है, ताकि उन्हें ज्वालामुखी से निकलने वाले मलबे से बचाया जा सके। पोपो कैट पेल ज्वालामुखी मेक्सिको शहर से करीब 80 मील दूर है। बताया जा रहा है कि इस ज्वालामुखी में पिछली बार धमाका साल 1994 में हुआ था। तब ज्वालामुखी में धमाके की वजह से मेक्सिको का प्यूबला शहर पूरी तरह से राख से ढंक गया था।

मेक्सिको का पोपो कैट पेल ज्वालामुखी करीब 500 सालों से सक्रिए नहीं था, लेकिन साल 1991 में ये ज्वालामुखी सक्रिए हो उठा। इसके बाद से ही इस ज्वालामुखी में रह रहकर धमाके होते रहते हैं। पिछले 15 दिनों से इस ज्वालामुखी में हलचल बढ़ गई थी और जब ज्वालामुखी फटा तो कुदरत का कहर दुनिया के सामने था।