'श्मशान में आयी एक फोन कॉल से बदली नरेंद्र मोदी की किस्मत'

नई दिल्ली (8अगस्त): नरेंद्र मोदी उस वक्त श्मशान में थे। एक फोटो जर्नलिस्ट की अंत्येष्टि हो रही थी। तभी उन्हें मिले एक संदेश ने उनके जीवन की राह बदल दी। उस वक्त मोदी बीजेपी की अंदरूनी राजनीति के हाशिये पर थे। अचानक उन्हें गुजरात जाने और जिम्मेदारी लेने का निर्देश दिया गया।

यह फोन प्रधानमंत्री निवास से था। अटल जी ने उन्हें 7 आरसीआर बुलाया था।  एक अक्तूबर, 2001 की इस घटना का जिक्र विजय त्रिवेदी ने अपनी किताब में किया है। इससे पहले की कहानी यह है कि नरेंद्र मोदी पार्टी के महासचिव और जिन राज्यों के चुनाव प्रभारी थे, वहां भाजपा हार चुकी थी। वो अपनी इस असफलता के बाद अमेरिका चले गये। कुछ दिनों बाद अटल जी भी अमेरिका आये। वहां दोनों की मुलाकात हुई।

अटल जी ने नरेंद्र मोदी को मैदान छोड़कर भागने से मना किया और दिल्ली में डटने को कहा। नरेंद्र मोदी ने मान भी और उसी का परिणाम थी वो फोन कॉल जिसने नरेंद्र मोदी को आज दुनिया में प्रतिष्ठा के सबसे ऊंचे शिखर पर बैठा दिया।

केशुभाई का इस्तीफा हुआ और नरेंद्र मोदी गुजरात के चीफ मिनिस्टर बन गये। तीन बार जीते ,  दुनिया के सबसे विवादित शख्सियत में से एक भी रहे, और फिर भारतीय प्रधानमंत्री बन कर दुनिया के सबसे मजबूत नेता बन कर उभरे। वो  ऐसे पहले भारतीय नेता रहे जिसको संवैधानिक पद पर आसीन होते हुए भी अमेरिका ने वीजा देने से इंकार कर दिया। दिन पलटे तो वही अमेरिका आज मोदी और भारत का सबसे घनिष्ठ दोस्त और साझीदार है।