कॉफी ही नहीं भाड़े के सैनिक भी एक्सपोर्ट करता है ये देश

नई दिल्ली (17 मई): युगांडा के युवक-युवतियां दुनिया के कई देशों की एंबैसी की सिक्योरिटी, वॉचटावर या वीवीआईपी काफिलों की सुरक्षा में तैनात किए जा रहे हैं। कुछ लोग इन्हें भाड़े के सैनिक कहते हैं,और डर रहता है कि कहीं आतंकी संगठन आईएसआईएस युगांडा  के युवक-युवतियां का इस्तेमाल न करने लगे। इस शक को खत्म करने के लिये। विदेशों में सैनिकों या सुरक्षाकर्मियों की तरह काम करने वाले युवक-युवतियाों को इंटरपोल के कड़ी निगाह से होकर गुजरना पड़ता है। युगांडा  के युवक-युवतियां  बाहर के देशों में अपनी सेवाएं देकर अच्छा पैसा कमा रहे हैं और अपने देश अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।

युगांडा  के युवक-युवतियां  विदेशों से पैसा कमाकर लौटने वाले युवक यहां वापस लौट कर जमीन खरीद रहे हैं, घर बना रहे हैं या फिर अपना व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग बिजनसवीक में डेविड हरबर्ट ने लिखा है कि कई साल तक युगांडा  को केवल उसके क्रूर तानाशाह ईदी अमीन के नाम से ही जाना जाता था, लेकिन अब युगांडा  की राजधानी कंपाला में शॉपिंग मॉल्स खुल रहे हैं, बड़-बड़ी इमारतें बन रही हैं। यहां के लोग आमतौर पर बेहद धार्मिक, पारिवारिक और सज्जन हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने युगांडा के लोगों के दोस्ताना बर्ताव के कारण ही इसे अफ्रीका के मोती बताया था। 

अब उगांडा कॉफी के साथ सुरक्षाकर्मियों को निर्यात करने वाला सबसे अधिक   निर्यात करने वाला देश बन गया है। हरबर्ट ने लिखा है कि उगांडा द्वारा निर्यात किए गये सुरक्षाकर्मी हर कहीं नजर आ जाएंगे। विदेशों में युवकों की भर्ती का विज्ञापन देने वाली कंपनियां हैं। कई देश उगांडा के युवकों को अपने यहां किराये के सैनिक की तरह काम करने के लिए नौकरी दे रहे हैं।'राजधानी कंपाला में इंटरपोल का भी अपना सक्रिय ब्यूरो है। इंटरपोल यहां से अन्य देशों में किराये के सैनिक या सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम करने जा रहे युवाओं पर नजर रखता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आईएसआईएस उनकी भर्ती तो नहीं कर रहा। इंटरपोल के अनुमान के मुताबिक उगांडा के लगभग 20,000 नागरिक विदेशों में सुरक्षाकर्मी या भाड़े के सैनिक की नौकरी कर रहे हैं।