नौकरी के लिए सक्षम नहीं मानसिक तौर पर बीमार लोग- मेनका गांधी

नई दिल्ली (29 जनवरी): महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने मानसिक तौर पर बीमार लोगों को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विकलांगता बिल 2014 मानसिक रूप से बीमार और मानसिक रूप से विकलांग लोगों में अंतर नहीं करता है। लेकिन इनके बीच अंतर होता है। अगर कोई व्यक्ति पागलपन का शिकार है तो कैसे उसे नौकरी दिया जा सकता है।

दरअसल मेनका गांधी मंत्रियों के उस टीम में शामिल हैं जिसे विकलांगता विधेयक 2014 की जांच करने के लिए बनाया गया है। बता दें कि इस बिल को शीतकालीन सत्र के दौरान पेश करने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा था कि राज्य सभा में पेश करने से पहले इस बिल के लिए कैबिनेट की रजामंदी जरूरी है। इसके बाद इस पर रोक लग गई थी।

विकलांगों के अधिकारों का राष्ट्रीय मंच' के सचिव एन मुरलिधरन को एक पत्र लिखकर यह कहा गया, 'हो सकता है दिमागी तौर पर पागलपन के शिकार लोग सभी प्रकार के नौकरियों के लिए सक्षम न हों लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि विकलांग लोग भी इसके लिए सक्षम न हो। ऐसे में यह तय करना गलत होगा कि केवल दिमागी तौर पर या मानसिक रूप से बीमार लोग रोजगार के लिए सक्षम नहीं हो सकते।

इधर, मेनका गांधी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर उनका विरोध किया। इसमें कई ऐसे लोग थे जो खुद दिमागी तौर पर बिमार हैं और फिर भी काम कर रहे हैं। उन्हीं में एक सेंटर फॉर एडवोकेसी इन मेंटल हेल्थ की भार्गवी डावर ने अपनी फोटो पोस्ट की है। उन्होंने लिखा है कि मेरा नाम भार्गवी डावर है। मैं मानसिक बिमारी से निकली हूं और समाज और परिवार के साथ अच्छे जीवन के लिए मैंने बहुत कड़ी मेहनत की है। इस पढ़ने के लिए धन्यवाद।