यूएन में मेनन की स्पीच और रूस के वीटो से भारत के हिस्से में रहा कश्मीर

नई दिल्ली (23 अक्टूबर): सन् 1957 में तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर वीके कृष्णा मेनन ने 23 जनवरी को यूनाइटेड नेशंस की सिक्योरिटी काउंसिल के सामने कश्मीर मुद्दे पर लगभग 8 घंटे भाषण दिया था। इस भाषण में उन्होंने पाकिस्तान को जमकर खरीखोटी सुनाई थी। इस भाषण को सबसे लंबे भाषण के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया था। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है।

मेनन के भाषण के बाद रूस ने भारत के पक्ष में वीटो का प्रयोग किया और कश्मीर भारत का अंग माना गया।  मेनन के इस ऐतिहासिक भाषण से पहले पाकिस्तान के डेलीगेट ने यूएन में  कश्मीर मुद्दा रखते हुए इसपर अपना दावा किया था। पाकिस्तान के तर्कों के आधार पर यह तय किया जाने लगा था कि कश्मीर में लोगों की राय पूछी जाए कि वे किसके साथ रहना चाहते हैं। भारत का यह तर्क था कि कश्मीर में बहुत से पाकिस्तानी घुस आए हैं, जो आम राय को पाकिस्तान के पक्ष में ले जाएंगे। पाकिस्तान के तर्कों के आधार पर यूएन के सभी देशों का झुकाव भी कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की ओर दिखाई दे रहा था, लेकिन मेनन के इस भाषण ने हवा बदल दी।

मेनन ने आजादी मिलने से लेकर पाकिस्तान द्वारा यहां पर किए गए अत्याचारों और आतंकवादी घटनाओं तक को यूएन के सामने रखा। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कश्मीर रियासत शुरू से ही भारत के साथ रहना चाहती थी। अपने 8 घंटे के भाषण में उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान की बखियां उधेड़ीं, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि यूएनके देश पाकिस्तान के ‘बहकावे’ में आकर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लेने लगे थे। मेनन के इस भाषण के बाद रूस (तब सोवियत संघ) ने अपनी वीटो पॉवर का उपयोग कर कश्मीर पर यूएन का ‘निर्णय’ पलट दिया था।