'आदमखोर उस्ताद' जिंदगी भर रहेगा सलाखों के पीछे

नई दिल्ली (30 मार्च): अपराध की सजा केवल इंसान को ही नहीं मिलती, जानवरों को भी मिलती है। सुप्रीम कोर्ट ने रणथम्भोर के एक आदमखोर बाघ को 'जेल' की सजा सुनायी है। दरअसल अब ये  बाघ अपने बाड़े से बाहर नहीं छोड़ा जायेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक उस्ताद नाम का ये बाघ आदमखोर हो चुका है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने इसे चिड़ियाघर में रखने को कहा।

इससे पहले बाघ संरक्षक अजय दूबे, सीनियर ऐ़डवोकेट इंदिरा जयसिंह ने आदमखोर को उसके प्राकृतिक आवास से हटाने की के आदेश को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस आर बानुमथी और जस्टिस यू ललित की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इंदिरा जयसिंह ने जिरह करते हुए कहा कि वन विभाग के अधिकारियों के पास इसके पुख्ता साक्ष्य नहीं हैं कि पिछले पांच सालों में बाघ के हमले में हुई मौतों के पीछे 'उस्ताद' ही था। जयसिंह ने कहा कि हो सकता है कि इंसान की लाश के पास बाघ को देखा गया हो, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि 'उस्ताद' ने उसे मारा हो।