मेघालय खदान मामला: 34 दिन बाद निकाला गया पहला शव, 14 की तलाश जारी


न्यूज24 ब्यूरो,नई दिल्ली (17 जनवरी):  भारतीय नौसेना ने पू्र्वी जयंतिया हिल्स में गैरकानूनी कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों की तलाश के 34वें दिन 200 फुट की गहराई से एक शव बरामद किया है। रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के दौरान नेवी को करीब 200 फीट की गहराई में एक मजदूर का शव मिला ह। बाकी के मजदूरों को तलाशने रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन जारी है।


बता दें कि जिले के लमथारी में 370 फुट गहरी अवैध सान खदान में पास की नदी से पानी चले जाने के बाद से 13 दिसंबर से 15 खदान मजदूर फंसे हुए हैं। खदान में पास की लितेन नदी का पानी भरने से खदान में काम कर रहे मजदूर अंदर ही फंस गए।  इस रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना भारतीय नौसेना  के गोताखोर और नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की टीम काम कर रही हैं। ओडिशा फायर सेफ्टी टीम के अलावा थाइलैंड की फुटबॉल टीम के रेस्क्यू के लिए पंप और कुछ जरूरी साजो-सामान मुहैया कराने वाली प्राइवेट कंपनी किर्लोस्कर की टीम मौके पर है।



ऐसा कहा जाता है कि जयंतिया पहाड़ियों के आसपास करीब 70 हजार बच्चे रैट माइनिंग का काम करते हैं।  राज्‍य में कोयला खनन की शुरुआत 19वीं सदी के मध्य में हो गई थी, लेकिन साल 1970 में कोयला खनन को सरकार ने अपने हाथों ले लिया था। तब मेघालय में कोयला खदानों के निजी दावेदारों को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था, लेकिन सरकारी निगरानी में लापरवाही के चलते रैट माइनिंग का अवैध काम चलता रहा है. इस गोरखधंधे को रोकने के लिए साल 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मेघालय में रैट होल माइनिंग पर बैन लगाया था, लेकिन ये बैन भी महज दिखावा साबित हुआ. मेघालय में रैट होल माइनिंग आज भी धड़ल्ले से की जा रही है।



सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार से पिछले हफ्ते कहा था कि 13 दिसंबर से अवैध कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को निकालने के लिए अब तक उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं है। उन्हें बचाने के लिए 'शीघ्र, तत्काल और प्रभावी' अभियान चलाने की जरूरत है क्योंकि यह जिंदगी और मौत का सवाल है।अदालत ने यह भी कहा कि लगभग तीन हफ्ते से खदान फंसे लोगों के लिए 'हर मिनट कीमती' है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो जिंदा हैं या मर गए हैं, उन्हें हर हाल में बाहर निकाला जाना चाहिए।



इससे पहले खदान हादसे में जीवित बच निकले मजदूर साहिब अली ने बताया था कि किसी भी तरह से अंदर फंसे लोगों के जीवित बाहर आने की उम्मीद नहीं है। आखिर कोई आदमी बिना सांस लिए कितने समय तक जिंदा रह सकता है। साहिब असम के चिरांग जिले का निवासी है। उसके साथ अन्य चार मजदूर भी कोयला खदान में पानी भरने के दौरान बच निकले।