मेरठ के मेयर का पार्षदों को निर्देश, वंदे मातरम गाओ या जाओ


नई दिल्ली(30 मार्च): मेरठ के मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने मंगलवार को कथित तौर पर सात नगर सेवकों को मीटिंग में हिस्सा नहीं लेने दिया। नगर सेवकों पर आरोप है कि उन्होंने वंदे मातरम गाने से इंकार कर दिया था।


- मेयर और भाजपा नेता हरिकांत अहलूवालिया ने नगर निगम बोर्ड के सभी पार्षदों को राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाने के निर्देश भा जारी किए हैं।


- निर्देश में कहा गया है कि जो ऐसा नहीं करेगा उसे बोर्ड मीटिंग रूम में घुसने या मीटिंग में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


- नगर निगम बोर्ड में कुछ मुस्लिम पार्षद भी हैं जिन्होंने इस घोषणा का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं है।


- यह मामला मंगलवार का है जब उत्तर प्रदेश में नई भाजपा सरकार बनने के बाद यह पहली बोर्ड मीटिंग थी।


- नगर निगम में वंदे मातरम का गायन पहले से होता आ रहा है, लेकिन अभी तक इसमें हिस्सा ना लेने वालों को हॉल से बाहर जाने की अनुमति थी और वो वंदे मातरम पूरा होने के बाद वापस आ जाते थे। लेकिन मंगलवार को जब कुछ मुस्लिम नगरपालिका सलाहकार हॉल से बाहर जाने लगे तो भाजपा सदस्य नारेबाजी करने लगे।


- मीटिंग रूम में ही “हिंदुस्तान में रहना होगा तो वंदे मातरम कहना होगा” के नारे लगाए गए।


- मामला गर्मा जाने के बाद मेरठ के मेयर को हस्तक्षेप करना पड़ा। मेयर ने ध्वनिमत के जरिए वंदे मातरम को गाना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य करने का प्रस्ताव पास किया। हालांकि प्रस्ताव को लागू करने के लिए अभी सरकार की तरफ से मंजूरी मिलनी बाकी है।


- वहीं, आहलूवालिया का कहना है कि वंदे मातरम अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान जताने का एक जरिए है। उन्होंने कहा कि जब निगम में मुस्लिम मेयर रहे थे तब भी वंदे मातरम गाया जाता था, तो इसमें विवाद कैसा है। नगर निगम बोर्ड में 80 सदस्य हैं, जिसमें से 45 भाजपा के और 25 मुस्लिम हैं। यहां काम करने वाले एक मुस्लिम काउंसलर ने कहा कि माहौल काफी गर्मा गया है, ऐसे में यहां से निकल जाना ही बेहतर होगा। हमें काफी बुरा लगा है। हमारे भी पूर्वजों ने देश की आजादी में सहयोग किया था।