"हम CPEC का विरोध नहीं करते, लेकिन कनेक्टिविटी पर फोकस करते हैं"

नई दिल्ली (5 जून): मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने मंत्रालय का लेखा-जोखा पेश किया। सुषमा ने चीन पर बोलते हुए कहा कि चीन कहता है कि हमारा विरोध भारत के खिलाफ नहीं है, हमारा विरोध नॉन एनपीटी देशों के खिलाफ है। लेकिन जब फ्रांस को शामिल किया गया तो वो भी नॉन एनपीटी देश था।


विदेश मंत्री ने कहा कि इसलिए हम कहते हैं कि एनपीटी की जगह हमारी भावना और इतिहास देखें। हम चीन के मित्र देशों के साथ इस पर सम्पर्क में हैं। ताकि वे चीन को बताए कि भारत की भूमिका हमेशा सही रहती है।


- हम कोई भी नीति किसी और को काउंटर करने के लिए नहीं बनाते। सीपैक (CPEC) का हम विरोध नहीं करते लेकिन कनेक्टिविटी पर फोकस करते हैं। चाबहार, BCIM कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट ही हैं। सवाल ये है कि इसकी उपयोगिता क्या है? चीन इस बात को समझेगा। सीपैक हमारी प्रभुसत्ता का मामला है। चीन के दो हेलिकॉप्टर उत्तराखंड में उतरे। लेकिन सीमा क्लियर नहीं इसलिए ये मामले हो जाते हैं। लेकिन एयर स्पेस का मामला है इसलिए हम उचित तरीके से उठाएंगे।

- चीन कहता है कि भारत से हमारा विरोध सीधा नहीं है। हमने उनसे कह दिया है कि फ्रांस भी नॉन एनपीटी कंट्री था। फिर वो पाकिस्तान की बात करता है। हमने कहा कि मटैरियल सप्लाई हमको विश्वसनीयता की वजह से मिला। हम चीन से बातचीत कर रहे हैं। हमारे मित्र देश भी यही कहते हैं कि भारत को एनएसजी की सदस्यता मिले। रूस भी यही कर रहा है क्योंकि उसके चीन से अच्छे रिश्ते हैं।