कुलभूषण मामलाः 'पाकिस्तानियों पूरा फैसला नहीं पढ़ सकते तो ICJ की प्रेस रिलीज ही पढ़ लो'

न्यूज 24 ब्यूरो नई दिल्ली (18 जुलाई): इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण मामले में दिये गये फैसले की पाकिस्तान में हो रही अलग ही व्याख्या पर भारत ने कहा कि पाकिस्तान की सरकार अगर 42 पेज का पूरा जजमेंट नहीं पढ़ पा रही है तो 7 पेज की प्रेस रिलीज पढ़ ले। इस प्रेस रिलीज में कहा गया है कि जजमेंट 15 के मुकाबले एक के आधार पर लिखा गया है। इस फैसले के पक्ष में 15 जज और विरोध में सिर्फ एक जज था। इस फैसले के हर एक पैराग्राफ में भारत की जीत की इबारत लिखी है। पाकिस्तान की सरकार के लगातार झूठ बोले जाने पर भारत के  विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार की कुछ मजबूरियां हैं जिसकी वजह से उसे अपने ही लोगों से झूठ बोलना पड़ रहा है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा,'मुझे लगता है कि वे कोई और फैसला पढ़ रहे हैं, मुख्य फैसला 42 पेजों का है। अगर उनमें 42 पेजों को पढ़ने का धैर्य नहीं है तो उन्हें 7 पेजों की प्रेस रिलीज पढ़ लेनी चाहिए, जहां हर प्वाइंट भारत के फेवर में है। मुझे लगता है कि उनकी अपनी कुछ मजबूरियां हैं जिसकी वजह से वे अपने ही लोगों से झूठ बोल रहे हैं।बुधवार को आईसीजे के फैसले के बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने 'ट्वीट कर कहा  था, 'जाधव पाकिस्तान में रहेगा। उसके साथ पाकिस्तान के कानूनों के मुताबिक व्यवहार किया जाएगा। यह पाकिस्तान के लिए जीत है।'  उन्होंने कहा था कि भारत जाधव को बरी कराना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।उन्होंने कहा, 'वे उसकी रिहाई चाहते थे, इसे मंजूर नहीं किया गया। वे उसकी वापसी चाहते थे, इसे भी खारिज कर दिया गया। अगर वे फिर भी जीत का दावा करते हैं तो...शुभकामनाएं।

'पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि आईसीजे के इस निर्णय की सराहना करते हैं कि उसने कुलभूषण जाधव को छोड़ने और रिहा करने के लिए नहीं कहा है। कुलभूषण पाकिस्‍तान के लोगों के खिलाफ किए गए अपराध के दोषी हैं। पाकिस्‍तान इस मसले में कानून के मुताबिक कार्यवाही करेगा।नीदरलैंड के हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्याय न्यायालय (आईसीजे) में बुधवार को कुलभूषण जाधव मामले में भारत की बड़ी जीत हुई। अदालत ने पाकिस्तान से कहा कि वह भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को दी गई मौत की सजा की समीक्षा करे। इसका अर्थ यह भी है कि जाधव की मौत की सजा पर आईसीजे ने जो रोक लगाई थी, वह जारी रहेगी।

इसके साथ ही आईसीजे ने जाधव तक राजनयिक पहुंच दिए जाने की भारत की मांग के पक्ष में फैसला सुनाया है। अब भारतीय उच्चायोग जाधव से मुलाकात कर सकेगा और उन्हें वकील और अन्य कानूनी सुविधाएं दे पाएगा।

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