मायावती की शिवपाल से हमदर्दी के पीछे है यह बड़ी वजह!

नई दिल्ली ( 22 जनवरी ): समाजवादी पार्टी में चाचा और भीतजे की लड़ाई में अब अकेले पड़े शिवपाल सिंह यादव के साथ मायावती की हमदर्दी देखी जा रही है। लेकिन मायावती की हमदर्दी यूं ही नहीं है। वह लंबे समय से कह रही हैं कि बाप-बेटे की लड़ाई में शिवपाल यादव को बलि का बकरा बनाया गया। मायावती ने अपनी शनिवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा कि शिवपाल को अपमानित किया जा रहा है। इससे साफ है कि परिवार की फूट को वह और हवा दे ही रही हैं, साथ ही उनकी नजर शिवपाल के वोटरों और समर्थकों पर भी है। इसके जरिए वह एसपी की फूट का फायदा विधानसभा चुनाव में लेना चाह रही हैं और शिवपाल समर्थकों को लुभा रही हैं।

जब से समाजवादी पार्टी परिवार में झगड़ा शुरू हुआ है, तब से मायावती कह रही हैं कि यादव वोट बैंक दो खेमों में बंट गया है। लगातार यह बयान देकर पहले तो उन्होंने मुसलमान वोटरों से साफ कहा कि सपा को वोट देने का कोई फायदा नहीं। इसके जरिए बीएसपी को मजबूत दिखाकर बीजेपी को हराने के लिए वोट करने की अपील की। वहीं एसपी की अंदरूनी फूट को बढ़ाने की कोशिश की ताकि यादव वोटर भ्रमित रहे।

जब समाजवादी पार्टी का झगड़ा और बढ़ा तो मायावती ने अखिलेश और मुलायम को एक दिखाने की कोशिश की और लगातार कहा कि यह पिता-पुत्र का ड्रामा है। वहीं शिवपाल यादव के साथ हमदर्दी दिखानी शुरू कर दी। वह कहती रहीं कि पिता-पुत्र की लड़ाई में शिवपाल यादव को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

मायावती के बयानों के अनुसार शिवपाल जब अब वास्तव में अकेले पड़ गए हैं, तो उन्होंने शनिवार को और ज्यादा हमदर्दी जता दी। यहां तक कह दिया कि शिवपाल को एक सीट तक सीमित कर दिया गया है और सपा में उन्हें अपमानित किया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि शिवपाल यादव भी बीएसपी में आएंगे तो उन्होंने कहा कि पहले वह गुजारिश करें तो इसका जवाब वह देंगी। शिवपाल समर्थकों के दर्द को कुरेदकर मायावती ने उनकी सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की है।

मायावती ने शिवपाल के प्रति इतनी ज्यादा हमदर्दी उस समय दिखाई है जब एक दिन पहले शिवपाल ने कार्यकर्ताओं के बीच खुद अपना दु:ख उजागर किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा तो नहीं हो रही लेकिन नेताजी ने कहा है, इसलिए लड़ रहे हैं।

इतना अपमान सहने और सब कुछ गंवा चुके शिवपाल के समर्थक पूरे प्रदेश में हैं। वह चुनाव सिर्फ जसवंतनगर से लड़ रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के अन्य विधान सभा सीटों पर कुछ भी शिवपाल समर्थक वोटर अखिलेश को हराने के मकसद से ही मायावती को सपोर्ट कर जाएं, तो यह बोनस ही होगा। शिवपाल के प्रति हमदर्दी दिखाकर मायावती इसी कोशिश में हैं।