मौलाना चतुर्वेदी, संस्कृत के श्लोकों के साथ पढ़ाते हैं कुरान

नई दिल्ली (6 सितंबर): उत्तर प्रदेश के मेरठ में दारुल उलूम देवबंद से पढ़े एक मौलाना, बच्चों को पढ़ाते समय संस्कृत के श्लोकों का भी हवाला दते हैं और कुरान की आयतों का भी। मौलाना महफ़ूज़ उर रहमान शाहीन जमाली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'मौलाना चतुर्वेदी' के नाम से मशहूर हैं।

मौलाना महफूजुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी (शैखुल हदीस) ने न सिर्फ मदरसा दारुल उलूम देवबंद से इस्लामिक शिक्षा की उच्च डिग्री ‘आलिम’ हासिल की है, बल्कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से संस्कृत से एमए (आचार्य) भी किया है। चारों वेदों का अध्ययन करने पर उन्हें चतुर्वेदी की उपाधि मिली है। ये सदर बाजार स्थित 130 साल पुराने मदरसा इमदादउल इस्लाम के प्रधानाचार्य हैं।

उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक पुस्तकों या वेदों का भी गहरा अध्ययन किया है। वो कहते हैं, "लोग यह सोचते हैं कि अगर ये मौलाना हैं तो फिर चतुर्वेदी कैसे हैं? मैं उनसे कहता हूं कि मौलाना अगर चतुर्वेदी भी हो जाए, तो उसकी शान घटती नहीं और बढ़ जाती है"। हिंदू धर्म में चारों वेदों का अध्ययन करने वालों को चतुर्वेदी कहा जाता है।

मौलाना अपने मदरसे में छात्रों को सहिष्णुता का पाठ पढ़ाते हैं। वो मानते हैं कि इसके लिए दूसरे धर्मों के बारे में भी जानना ज़रूरी है। मौलाना चतुर्वेदी कहते हैं, "हमारा संदेश यह है कि लोगों में दूरी, ज़्यादा ताक़त की इच्छा से बढ़ती है। लेकिन मानवता के रिश्ते में कोई भेदभाव नहीं है, इसलिए वेदों में मानवता के बारे में कई गई बातों का हवाला देकर, मैं लोगों को एक दूसरे के क़रीब लाने की कोशिश करता हूं"।

उनके मुताबिक़, "वेदों में तीन मूल बातें कही गई हैं, भगवान की पूजा, इंसान की मुक्ति और मानव सेवा। मैं समझता हूँ कि ये तीनों बातें इस्लाम के संदेश में पहले से ही मौजूद हैं"।

shaheen jamali chaturvedi