यही है वह शख्स जिसके इशारे पर श्रीकृष्ण की नगरी हुई लाल

नई दिल्ली(३ जून) गुरुवार को मथुरा के जवाहरबाग में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस और दंगाईयों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें दो अफसरों की मौत हो गई और कई पुलिस वाले जख्मी है। पुलिस पर हमले में भूमिका एक गुट की है, जिससे जुड़े लोग खुद के सत्याग्रही होने का दावा करते हैं। गुट का लीडर रामवृक्ष यादव है जिसके एक इशारे पर यह सबकुछ हुआ।

कौन है यह शख्स

रामवृक्ष गाजीपुर का रहने वाला है। 15 मार्च 2014 में करीब 200 लोगों के साथ मथुरा आया था और इसने प्रशासन से यहां रहने के लिए दो दिन की इजाजत ली थी। लेकिन दो दिन बाद भी वो यहां से हटा नहीं। शुरुआत में वो यहां एक छोटी सी झोपड़ी बना कर रहता था, धीरे-धीरे यहां पर और झोपड़ियां बनीं, इसके बाद उसने 270 एकड़ में अपनी सत्ता चलाने लगा।

वह इतना ताकतवर हो गया कि प्रशासन भी उसका कुछ नहीं कर पा रहा था। बता दें कि मथुरा में 2014 से लेकर 2016 तक इस पर 10 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं। जिसमें पुलिस अधिकारयों पर हमला, सराकरी संपत्ति पर अवैध कब्जा शामिल है। विजयपाल तोमर नामक एक याचिकाकर्ता जब इसक कब्जे के खिलाफ कोर्ट गए तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे खाली करने का आदेश दिया था। जिसके बाद मई में रामवृक्ष यादव इस आदेश के खिलाफ कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए 50 हजार का जुर्माना भी लगाया था।

लगातार तीन दिन से पुलिस इस जगह को खाली करने की घोषणा कर रही थी।  इस दौरान उसने शूटरों और अपराधियों को अपने कैंप में रखने लगा। हैंड ग्रेनेड, हथगोला, रायफल, कट्टे, कारतूस छिपाकर जुटाए गए थे।रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य रह चुका है। उसने जयगुरुदेव के विरासत के लिए भी दावेदारी की कोशिश की थी।

जानकारी के मुताबिक जयगुरुदेव के निधन के बाद विरासत के लिए तीन गुटों में टकराव हुआ। पंकज यादव और उमाकांत तिवारी के बीच टकराव हुआ और पंकज यादव उत्ताराधिकारी बना। वहां समर्थन न मिलने पर रामवृक्ष अलग गुट बनाकर मथुरा के जवाहरबाग में 270 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। कहा जाता है कि 5 हजार लोग उसके लिए काम करते थे। उसी कहने के पर इस पूरी झड़प को हिंसक रुप से अंजाम दिया गया।