...तो जिंदा है रामवृक्ष यादव !, नहीं मैच हुआ DNA

मथुरा (17 अप्रैल): 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग कांड में नया नया मोड़ आ गया है। मुठभेड़ में मारे गए रामवृक्ष यादव का DNA उसके बेटे से मैच नहीं हुआ है। हैदराबाद फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री की रिपोर्ट के मुताबिक जिस शव को रामवृक्ष का बताया जा रहा है, उसका DNA रामवृक्ष के बेटे से मैच नहीं हुआ है।


आपको बता दें कि 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग पार्क में रामवृक्ष यादव और उसके समर्थकों के साथ पुलिस मुठभेड़ में 2 पुलिस अधिकारियों समेत करीब 20 लोग मारे गए थे। इसमें रामवृक्ष यादव भी शामिल था। लेकिन उसका शव बुरी तरह से जल चुका था इसलिए पहचान मुश्किल हो रही थी। जिसके बाद पुलिस ने रामवृक्ष के बेटे को ढूंढकर उसका DNA चेक कराया, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दोनों का DNA मैच नहीं हुआ है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह शव रामवृक्ष यादव का नहीं था ? क्या रामवृक्ष यादव अभी भी जिंदा है ?


गौरतलब है कि रामवृक्ष यादव जवाहरबाग का स्वयं-भू राजा बन गया था। उसने 15 मार्च 2014 में प्रशासन से 2 दिन जवाहरबाग में रहने की इजाजत मांगी थी। लेकिन उसके बाद रामवृक्ष यादव और उसके समर्थकों ने 270 एकड़ में फैले जवाहरबाग पर अवैध कब्जा जमा लिया। धीरे-धीरे पार्क में आटा चक्की मिल, राशन की दुकानें, सब्जी मंडी और ब्यूटी पार्लर तक खुल गया। इसके बाद एक याचिका के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जवाहरबाग को खाली कराने का प्रशासन को निर्देश दिया। इसी दौरान 2 जून 2016 को कब्जा हटाने के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई थी।


वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी घटना बिना राजनैतिक संरक्षण प्राप्त हुए नहीं घट सकती। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आरोपी रामवृक्ष यादव को तत्कालीन सपा सरकार का संरक्षण प्राप्त था और अभी भी वह जीवित हो सकता है और कहीं छुपा हुआ हो सकता है। बता दें कि इस घटना में तत्कालीन मथुरा एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार यादव शहीद हुए थे।


इस घटना के बाद यूपी की सरकार ने एक सदस्यीय जांच समीति गठित की। लेकिन यूपी के राज्यपाल राम नाईक के निर्देश पर जांच समीति को निरस्त कर CBI जांच का फैसला लिया गया। जिसके बाद 2 मार्च को कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।