पहाड़ पर आग का असर मैदान पर: ग्लेशियर से लेकर ओजोन परत तक खतरा

नई दिल्ली (3 मई) : उत्तराखंड के सभी जिलों के जंगलों में लगी आग अब हिमालय के लिए खतरा बन गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि आग की वजह से निकल रही कार्बन डाईऑक्साइड गैस से ग्लेशियर के पिघलने का खतरा बढ़ गया है। तेजी से बढ़ रही आग से ओजोन परत पर सीधे असर पड़ रहा है।

माना जा रहा है कि बाइस दिनों के भीतर उत्तराखंड के जंगलों में जो आग भड़कती हुई तेरह जिलों में फैल गई है। उसके कारण अब उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी और बढ़ रही है। इस आग को नॉर्थ इंडिया में पारा और तेज़ चढ़ाने की एक वजह भी माना जा रहा है। 

कहा जा रहा है कि उत्तर भारत के तापमान में 0.2 डिग्री सेल्यिसस का इजाफा उत्तराखंड की आग के कारण हुआ है। दिल्ली में तो सोमवार सीजन का सबसे गर्म दिन तक बन गया। दिल्ली में दोपहर का पारा 45 डिग्री पर रिकॉर्ड हुआ था।  

उत्तराखंड में ग्लेशियर 3500 मीटर से 4000 मीटर की ऊंचाई पर शुरु हो जाते हैं। दावा है कि कम ऊंचाई वाले ग्लेशियर पर आग की वजह से ब्लैक कार्बन की हल्की परत बनने लगी है। गंगोत्री, नेवला, चीपा, मिलम, सुंदरढूंगा जैसे ग्लेशियर इस आग की वजह से तेजी से पिघल सकते हैं। (दिल्ली से पल्लवी झा के साथ अधीर यादव, देहरादून)

देखिए न्यूज़24 की रिपोर्ट...

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