मैरी कॉम ने दिखाया प्रतिभा नहीं अमीरी की मोहताज


नई दिल्ली (8 मार्च):
मैरी कॉम किसी परिचय की मोहताज़ नहीं है। महिला मुक्केबाजी की दुनिया में मैरी कॉम भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में धूम मचा चुकी हैं। उन्होंने अपनी लगन और कठिन परिश्रम से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा का अमीरी और गरीबी से कोई संबंध नहीं होता।

अगर आप के अन्दर कुछ करने का जज्बा है तो सफलता हर हाल में आपके कदम चूमती है। पांच बार ‍विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी मैरी कॉम अकेली ऐसी महिला मुक्केबाज़ हैं, जिन्होंने अपनी सभी 6 विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीता है।

2014 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ बनीं। मुक्केबाजी में देश का नाम रौशन करने वाली मैरी को भारत सरकार ने 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। 2006 में पद्मश्री और 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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