ये है शहीद कैप्टन कुंडु की लिखी आखिरी कविता, सोशल मीडिया पर हुई वायरल

नई दिल्ली(6 फरवरी): पाकिस्तान की गोलीबारी में शहीद हुए 23 साल के कैप्टन कपिल कुंडू का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में हुआ। उनके चचेरे भाई विवेक कुंडू ने उन्हें मुखाग्नि दी। 

- कैप्टन कपिल के शौर्य का जितना बखान किया जाए, उतना कम है। 

- उन्हें कविताएं लिखने का बड़ा शौक था। वह अपनी बहनों को अपनी दिल की बातें कविताओं के जरिए बयां किया करते थे। 

- अब उनकी एक आखिरी कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कैप्टन कुंडू ने लिखा था-

कमी नहीं है मेरे मुल्क में उस पर मर मिटने वालों की

अपने लहू से सींचा है उन परवानों ने, यूं ही नहीं ये वादियां जन्नत कहलाती हैं। आज भी खड़ी है रूह-ए-आशिक इन सरहदों पे, आजमाना है किसी को अपना जोर तो आए। पूछा खुदा ने काफी कत्ल किए हैं उन जहान में, बोला, आशिक-ए-वतन हूं गुनाहों की हर सजा मंजूर है। करके नम अपने चशम, बोले निज़ाम-ए-आलम, ऐसे दलेर आशिक से पहली दफा पाला पड़ा है। बोला, खुदा कतार बहुत लंबी है अभी आने वालों की, कमी नहीं है मेरे मुल्क में उस पर मर मिटने वालों की।