केंद्र सरकार ने इस प्रदेश में दी बंदरों को मारने की परमिशन

लियाकत, शिमला (7 अप्रैल): ये खबर आपको चौंका सकती है। अब शिमला में बंदरों को मारने की परमिशन मिल गई है। ये परमिशन केंद्र सरकार ने दी है और छह महीने तक किसी को भी भी बंदरों की जान लेने की आजादी मिल चुकी है। हालांकि अभी बंदरों के कत्ल पर हिमाचल हाईकोर्ट ने बैन लगा रखा है। ऐसे में अब प्रदेश का वन विभाग केंद्र सरकार से मिले लाइसेंस टू किल की जानकारी हाईकोर्ट में पेश करेगा, जिसके बाद अगर हाईकोर्ट बंदरों का मारने पर से रोक हटाती है तो लोग अपना नुकसान बचाने के लिए बंदरों का वध कर सकेंगे।

बंदरों को मारने की जरुरत क्यों पड़ी:

दरअसल शिमला शहर में बंदरों की तादाद में हर साल इजाफा हो रहा है। बीते 3 सालों में बंदरों ने 300 लोगों को काटकर जख्मी किया है। सरकार को जख्मी लोगों को 19 लाख का मुआवजा देना पड़ा है। बंदरों की वजह से 184.28 करोड़ रुपये की फसल तबाह हो चुकी है।

नगर निगम शिमला के तहत आने वाले क्जाखू, समरहिल, कैथू, खलीणी, फागली, टूटीकंडी और भराड़ी में जुलाई 2015 में बंदरों की संख्या ढाई हजार के करीब थी, जो साल 2013 के मुताबिक काफी ज्यादा है। ये हालात भी तब है जब सरकार लगातार बंदरों का नसबंदी कार्यक्रम चला रही है। राज्य सरकार के 2006-07 से ही नसबंदी कार्यक्रम चला रही है और अब तक 51 फीसदी से अधिक बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। फिर भी बंदरों के नियंत्रण के लिए उनकी जान लेना जरूरी हो गया है और लोग इस फैसले का स्वागत भी कर रहे हैं।

वीडियो:

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