नीलगाय पर भिड़े PM मोदी के दो बहुत बड़े मंत्री

सौरभ कुमार, नई दिल्ली (9 जून): पिछले दो सालों से आपने राजनीति में गाय की महिमा का खूब गुणगान सुना होगा। अब नीलगाय के नाम पर होने वाली राजनीति की कहानी सुनिए। बिहार में कोई ढाई सौ नीलगायों को मार डाला गया है। क्योंकि वो किसानों की लाखों एकड़ फसल बर्बाद कर देती थीं और इसी वजह से उन्हें संरक्षित जीवों की सूची से बाहर किया गया था। इसी बात पर मोदी सरकार के दो बहुत बड़े मंत्री आपस में भिड़ गए हैं।

तो गाय की राजनीति का अगला चरण ये है कि अब नीलगाय पर राजनीति हो रही है। और ये वाली राजनीति इतनी संवेदनशील है कि सरकार के ही दो मंत्री आपस में भिड़ गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से सवालों की बौछार कर दी है। अपने ही सरकार के मंत्रालय को कठघऱे में खड़ा कर दिया है कि बताइए नीलगायों के कत्ल में पर्यावरण मंत्रालय को ऐसा भी क्या मजा आता है कि बिहार में शिकारियों को बुलाकर नीलगायों का कत्लेआम मचाए हुए हैं।

बिहार में गंगा किनारे के इलाकों की खेती को नीलगायों से बचाने के लिए हैदराबाद से खास शूटर बुलाए गए हैं। ये खानदानी शूटर पिछले तीन दिनों में 250 से ज्यादा नीलगायों को मार चुके हैं। नीलगायों की हत्या से मेनका गांधी इतनी आहत हैं कि उन्होंने सीधे पर्यावरण मंत्रालय को लताड़ लगा दी। मंत्रीजी कह रहे हैं कि उन्होंने तो राज्यों की सिफारिश पर नीलगायों को मारने की इजाजत दी थी।

दरअसल बिहार में हर साल नीलगायें लाखों एकड़ की फसल को बर्बाद कर देती है। खासकर गंगा किनारे के मोकामा जैसे इलाकों में किसान नीलगायों से किसान त्रस्त हैं। इस कारण 

2013 में नीतीश कुमार की सरकार ने नीलगायों को संरक्षित जीवों की सूची से बाहर करने की मांग की थी। पर्यावरण मंत्रालय के संरक्षण की वजह से नीलगाय को मारना कानून जुर्म था। बिहार सरकार की मांग पर नीलगाय को संरक्षित जीव की श्रेणी से बाहर निकाल दिया गया। उसके बाद बिहार सरकार ने नीलगायों को खत्म करने के लिए शूटर बुलवा लिए।

जंगली जानवरों से खेतों को बचाने के लिए बंगाल में हाथियों को हिमाचल में बंदरों को और गोवा में मोरों को मारने की इजाजत दी गई है। फसल बचाएं कि जंगली जानवर इस सवाल का कोई माकूल जवाब भी मिल जाए लेकिन मामला सियासी होते ही ये सवाल उलझ जाता है।