नीलगाय के बाद बंगाल में हाथियों को और हिमाचल में बंदरों को मारने के आदेश

पटना (10 जून): बिहार में नील गाय के शिकार पर पूरे देश में बहस जारी है। शिकार के मसले पर केंद्र के दो मंत्री भी आमने-सामने आ चुके है और अब यूपी के सीतापुर से नीलगाय के शिकार का वीडियो सामने आया है। सीतापुर में किसान नीलगायों से परेशान हैं और वो फसलों की हिफाजत के लिए अब नीलगायों का शिकार कर रहे हैं।  शिकार करने वाले वो किसान है, जो नीलगाय के उत्पात से परेशान है। फसलों के नुकसान को रोकने के लिए अब नीलगाय का शिकार करना शुरू कर चुके हैं।

जंगली जानवरों से खेतों को बचाने के लिए बंगाल में हाथियों को हिमाचल में बंदरों को और गोवा में मोरों को मारने की इजाजत दी गई है। फसल बचाएं कि जंगली जानवर इस सवाल का कोई माकूल जवाब भी मिल जाए लेकिन मामला सियासी होते ही ये सवाल उलझ जाता है।

आपको बता दें कि सीतापुर इलाके में मक्का, गेंहू और सब्जियों की खेती की जाती है। जब-तब नील गायों का झुंड खेतों में धावा बोल देता है और फसलों को बर्बाद कर देता है। स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी नीलगायों के आतंक से किसानों को छुटकारा नहीं मिला। जिसके बाद किसानों ने नीलगायों आतंक कम करने के लिए ये कदम उठाना शुरु कर दिया है।

बहरहाल बिहार में भी इन दिनों नील गाय का शिकार किया जा रहा है, जिसे सरकारी मंजूरी मिली हुई है और इस पर बहस जारी है। पशु प्रेमी और सरकार आमने-सामने हैं। देखना होगा कि यूपी में नील गाय के शिकार पर सरकार का क्या रुख सामने आता है।

दो केंद्रीय मंत्री आमने-सामने वहीं दूसरी तरफ प्रकाश जावड़ेकर ने सफाई दी है। उनका कहना है कि राज्य सरकार की मांग पर नील गायों को मारने की मंजूरी दी गई है। केंद्र सरकार के दो मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। मेनका गांधी ने आरोप लगाया है कि एनवायरन्मेंट मिनिस्ट्री राज्यों को लेटर लिखकर जानवरों को मारने के लिए कह रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से सवालों की बौछार कर दी है। मेनका गांधी ने सवाल पूछा है कि पर्यावरण मंत्रालय को ऐसा भी क्या मजा आता है कि बिहार में शिकारियों को बुलाकर नीलगायों का कत्लेआम मचाए हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर, एनवायरन्मेंट मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि सारे आदेश कानून के दायरे में दिए गए हैं। प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि राज्यों की सिफारिश पर नीलगायों को मारने की इजाजत दी गई है। 

कुछ महत्वपूर्ण बातें > 2013 में नीतीश कुमार की सरकार ने नीलगायों को संरक्षित जीवों की सूची से बाहर करने की मांग की थी। > पर्यावरण मंत्रालय के संरक्षण की वजह से नीलगाय को मारना कानून जुर्म था। > बिहार सरकार की मांग पर नीलगाय को संरक्षित जीव की श्रेणी से बाहर निकाल दिया गया। > उसके बाद बिहार सरकार ने नीलगायों को खत्म करने के लिए शूटर बुलवा लिए।