जानें आखिर क्यों सुलग रहा है एमपी, किसानों की क्या हैं मांग

इंदौर (8 जून): मध्य प्रदेश किसान आंदोलन की आग में जल रहा है। मंदसौर में पुलिस की गोली से 5 किसानों की मौत के बाद यह और ज्यादा भड़क गई है। जिसके चलते मंदसौर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। हालांकि कर्फ्यू लगने के बावजूद भी स्थिति बेकाबू है।


विपक्ष लगातार शिवराज सरकार पर निशाना साध रहा है। जबकि सरकार इसे कांग्रेस और दूसरी पार्टियों की साजिश बताने में जुटी हुई है।


क्या हैं किसानों की मांग और सरकार का पक्ष?


किसानों की पहली मांग है कि कर्ज पूरी तरह माफ हो। इस पर सरकारी पक्ष है कि इस पर एमपी सरकार ने कहा है कि पूरी तरह कर्ज माफ नहीं कर सकते।


किसानों की दूसरी मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर लागत से 50% ज्यादा फसलों की कीमत दी जाए। इसपर सरकार की हालत है कि राज्य सरकारों के पास फसल खरीदने की ना नीति है, ना तैयारी है। मध्य प्रदेश ने पिछले साल 65 करोड़ का प्याज खरीदा, जो खराब व्यवस्था के चलते सड़ गया।


किसानों की तीसरी मांग है कि खेती के लिए बिना ब्याज के कर्ज मिले। मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि खेती के लिए शून्य ब्याज दर पर किसानों को कर्ज दे रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार के पास फिलहाल ऐसी कोई नीति नहीं है।


किसानों की एक और बड़ी मांग है कि उन्हें पेंशन दी जाए। पेंशन की मांग पर किसी सरकार ने अभी तक विचार ही नहीं किया। सरकार कैसे किसानों का चयन करेगी, किसे कितनी पेंशन मिलेगी इस पर फिलहाल कोई नीति नहीं है।