WATCH : दूसरों को बचाने के लिए खुद को ज़हरीले सांपों से डसवा रहा है यह शख्स

नई दिल्ली (22 जनवरी) :  एक अमेच्योर वैज्ञानिक ने खुद को सांप से 160 बार डसवाया। इस वैज्ञानिक ने ऐसा इसलिए किया कि वो ज़हरीले सांपों के डसने की काट 'ह्यूमन एंटीडॉट' ढ़ूंढने की कोशिश में लगा है।

बारक्रॉफ्ट मीडिया से बातचीत में टिम फ्रीडे नाम के इस वैज्ञानिक ने कहा- "हर साल करीब एक लाख लोग सांपों के डसने से मर जाते हैं। जब तक मैं इस समस्या के तोड़ के लिए वैक्सीन नहीं ढूंढ लेता, चैन से नहीं बैठूंगा। चाहे इस काम में मेरी जान ही क्यों ना चली जाए।"

'द इंडीपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रीडे को हाल में दो बहुत ही घातक 'ताइपान' और 'ब्लैक माम्बा' सांपों ने काटा। इन दोनों को फ्रीडे ने विस्कोंसिन में अपने घर पर रखा हुआ है। इसके अलावा फ्रीडे के पास दो रैटलस्नेक्स और वाटर कोबरा भी है। फ्रीडे ने ज़हरीले सांपों के काटने के अनुभव पर बताया कि "इससे बड़ी तेज़ चुभन होती है। ये सच में दर्द करता है और फिर वो जगह सूज जाती है।"

फ्रीडे 2011 में लगातार दो बार कोबरा के काटने से कोमा में चले गए थे और करीब करीब जान से हाथ धो बैठे थे। फ्रीडे ने कहा, "ऐसी स्थिति से गुजरने के बाद अब मैं वहां पहुंचने वाला हूं जहां सांपों के काटने की समस्या पर काबू पा लूंगा।"

फ्रीडे ने कहा, "मैंने ये सब इसलिए शुरू किया क्योंकि मैं खुद के लिए प्रतिरक्षक तैयार करना चाहता था। लेकिन जब मैंने इसके नतीजों को देखा तो सोचा कि इससे पूरी मानव जाति को लाभ पहुंचाया जा सकता है। दुनिया में बहुत सारे लोग सांप के काटने से हर साल मरते हैं। मेरी वैक्सीन जब पूरी विकसित हो जाएगी तो इस समस्या से पार पाया जा सकेगा।"

लंदन स्कूल ऑफ हाइजिन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ राशेल करियर ने कहा कि हर साल सांप के काटने से एक लाख लोग मरते हैं और चार लाख लोग अपंगता के शिकार हो जाते हैं।  

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