...तो इसलिए कचरे की चिता पर युवक ने किया पत्नी का अंतिम संस्कार

नई दिल्ली (5 सितंबर): मध्य प्रदेश के नीमच इलाके के रतनगढ़ गांव में एक आदिवासी समुदाय के एक युवक को पैसे की कमी के कारण कचरे के ढ़ेर पर ही पत्नी का अंतिम संस्कार करना पड़ा। जगदीश भील नाम के युवक के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वो अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां खरीद सके। जिसके कारण उसने तीन घंटे तक कचरा इकट्ठा किया और कचरे के ढ़ेर पर अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार किया।

जगदीश की माने तो उसकी पत्नी नोजीबाई का शुक्रवार सुबह निधन हुआ। इसके बाद वह अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां लेने रतनगढ़ गए। लेकिन, ग्राम प्रधान ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास 'पारची' के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं जिसमें 2,500 रुपए लगते हैं। जगदीश ने कई लोगों से मदद मांगी लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद जगदीश के परिवार और कुछ मित्रों ने तीन घंटे तक कचरा जमा किया। 

श्मशान में कर्मचारियों ने उसे कहा कि पैसे नहीं है तो शव को दफना दो। इस पर वह शव को दफनाने के लिए फावड़ा भी ले आया। उधर स्थानीय लोगों को इस बात का पता चला तो उन्होंने नगर पालिका में जाकर उसकी मदद करने को कहा। इसके बाद लकड़ि‍यां पहुंची लेकिन रास्ता खराब होने के कारण वाहन ने सारी लकड़ि‍यां बीच रास्ते में ही छोड़ दी। इसके बाद जगदीश पत्नी के शव को लेकर वहां पहुंचा और उन लकड़ि‍यों से चिता नहीं जलने पर बेकार पड़े टायरों और कचरे का इस्तेमाल किया।