मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति नौशीद की अपील, कहा- हमारी वजह से भारत-चीन में न बिगड़े संबंध

माले (18 फरवरी): इन दिनों मालदीव बुरे दौर से गुजर रहा है और वहां आपातकाल लगा हुआ है। राजनीतिक संकट के बीच पूर्व राष्ट्रपति नौशीद मालदीव छोड़कर श्रीलंका में निर्वासित जीवन विता रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नौशीद मालदीव में जारी संकट के लिए भारत से सैन्य हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं। लेकिन उनकी इस मांग का चीन ने विरोध किया है। चीन का कहना है मालदीव में किसी भी सैन्य हस्तक्षेप का विरोध किया था कि ऐसे कदम से स्थिति और बिगड़ जाएगी। 

बेंगलुरू में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने कहा कि उनका देश भारत और चीन के बीच कोई दरार खड़ी नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत और चीन बिल्कुल ही एक दूसरे के विरुद्ध न हों। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मालदीव चीन से 'चांद-तारों' की मांग नहीं करता लेकिन चाहता है कि वह भारत से संबंध न बिगाड़े।
नशीद कहा कि हम चीन को पसंद करते हैं। मेरे मन में उनके विरुद्ध कुछ भी नहीं है, लेकिन हम जो कह रहे हैं वह यह है कि वह राज्य-शासन कला में बदलाव का प्रयास न करें, गुप्त ढंग से अपना पैसा न लगाएं, पारदर्शिता रखें और लोकतांत्रिक निगरानी रखें, चीजें सही हो जाएंगी।  

आपको बता दें कि मालदीव में उस वक्त राजनीतिक संकट पैदा हो गया था जब वहां सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को विपक्षी पार्टियों समेत 9 कैदियों की गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित बताकर उन्हें रिहा करने का का आदेश दिया लेकिन देश के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। जिसके बाद वहां स्थिति बिगड़ गई और राष्ट्रपति यामीन ने आपातकाल की घोषणा कर दी। इसके बाद सेना सुप्रीम कोर्ट में घुस गई और चीफ जस्टिस को हिरासत में ले लिया। मालदीव के नेताओं के भारत से मदद मांगने के बाद चीन ने नाराजगी जाहिर की थी और किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करते हुए कहा था इससे स्थिति और बिगड़ेगी।