चालबाज चीन को करारा जवाब देने की तैयारी में भारत और अमेरिका

नई दिल्ली (17 दिसंबर): चतुर चीन हर मोर्चे पर भारत को घेरने की ताक में रहता है। द्विपक्षीय, अंतर्राष्ट्रीय या फिर पाकिस्तान से ही जुड़ा कोई मुद्दा क्यों ना हो वह भारत की राह में हर मुमकिन रोड़ा डालने के लिए तैयार खडा़ दिखता है। लिहाजा भारत भी धीरे-धीर ड्रैगन के इस चाल को समझने लगा है और चालबाज चीन के निपटने के अपनी कुटनीति और रणनीति में भी बदलाव कर रहा है।


हिंद महासागर को अपना जागीर समझ रहे चीन के मंसूबों पर लगाम लगाने के लिए भारत और अमेरिका रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है। भारत और अमेरिका अपन सालाना मालाबार नौसेना अभ्यास को और ज्यादा विस्तार देने की योजना बना रहा है जिससे ऐंटी-सबमरीन ऑपरेशन को नई धार मिल सके। वहीं जापान इस नौसेना अभ्यास का अब नियमित सहभागी बन चुका है।


इसी सिलसिले में शुक्रवार को दिल्ली में अमेरिका के सातवें बेड़े के वाइस ऐडमिरल जोसेफ पी. एकॉइन ने इंडियन नेवी चीफ ऐडमिरल सुनील लांबा और बड़े अधिकारियों से मुलाकात की। मुलाकात के बाद वाइस ऐडमिरल जोसेफ ने कहा कि अगले साल हिंद महासागर में 21वां मालाबार नौसेना अभ्यास होने वाला है, और वो चाहते हैं यह और ज्यादा बड़ा और व्यापक हो।


वाइस ऐडमिरल जोसेफ ने कहा कि दुश्मन के सबमरीन को नाकाम करने की तकनीक काफी फायदेमंद होगी। इसलिए वह चाहते हैं कि मालाबार अभ्यास में इस पर जोर रहे। भारत पेट्रोलिंग के लिए अमेरिका के P-81 एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करता है जो आधुनिक रडार सिस्टम, खतरनाक हार्पून ब्लॉक 2 मिसाइल्स और एमके-54 लाइटवेट टॉरपिडो से लैस है।


एशिया-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका चाहेगा कि मालाबार सैन्य अभ्यास में नियमित तौर पर ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ दूसरे देशों को भी शामिल किया जाए। दूसरी तरफ चीन इस तरह के किसी भी 'नौसैनिक समूह' को खुद के खिलाफ देखता है। 2007 में बंगाल की खाड़ी में हुए मालाबार अभ्यास में जापान, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर भी शामिल हुए थे, जिस पर चीन ने कड़ा ऐतराज जताया था।


भारतीय जल सेना ने हिंद महासागर में कम से कम 6 ऐसे चीन की पनडुब्बियों का पता लगाया है जो पिछले 4 साल से कराची के आस-पास घूम रहा है। हिंद महासागर में चीन की आक्रामक रणनीति की काट के लिहाज से भारत-अमेरिका नौसेना अभ्यास काफी अहम है।