पिता-पुत्र का पर्व है मकर संक्रांति, जानें ऐसी ही खास बातें

नई दिल्ली(14 जनवरी): देश आज धूमाधाम से मकर संक्रांति मना रहा है। मकर संक्रांति को पिता-पुत्र के पर्व के रूप में भी जाना जाता है।

- इस दिन पुत्र और पिता को तिलक लगाकर उनका स्वागत करना चाहिए। इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं और दो माह तक रहते हैं।

- इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं। इससे दिन बड़ा और रात छोटी होना शुरू हो जाती हैं।

- सूर्य देव के उत्तरायण में प्रवेश करने का वर्णन वेद और पुराण में भी है। इसी दिन मलमास भी समाप्त होते हैं। इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है।

- मकर संक्रांति से कई कथाएं भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि गंगाजी को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों का तर्पण इस दिन किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगाजी समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।

- महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इस प्रकार यह दिन बुराइयों के अंत का दिन भी माना जाता है। दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है।