'60% नागरिकों का मानना- इस्लाम जर्मनी का हिस्सा नहीं'

नई दिल्ली (14 मई): जर्मनी में चांसलर एंजेला मर्केल देश में सहिष्णुता और एकजुटता के लिए लगातार अपील कर रही हैं। लेकिन लगता है उनके कहने का कोई भी असर देश में नहीं हो रहा है। जर्मनी में इस्लाम को लेकर लोगों की राय पर आधारित एक सर्वे किया गया। जिसमें इस बात की साफ झलक मिलती है।

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में कराया गया एक ताजा सर्वे का निष्कर्ष है कि करीब दो तिहाई जर्मन नागरिकों की राय है कि 'इस्लाम उनके देश से संबंधित नहीं है।' 6 साल पहले इसी तरह का एक सर्वे किया गया था। जिसमें पता चला था कि करीब 47 फीसदी लोगों की राय थी कि 'इस्लाम की उनके देश में कोई जगह नहीं है।' अब नए सर्वे में यह राय काफी बढ़ गई है। अब 60 फीसदी लोग मानते हैं कि इस्लाम की उनके देश में जगह नहीं।

इस सर्वे की उस समय के प्रेसीडेंट क्रिस्चियन वुल्फ की सहमति के बाद काफी आलोचना हुई थी। वुल्फ की राय में इस्लाम जर्मनी राष्ट्र का हिस्सा है। इसके बाद सामाजिक वक्ताओं की तरफ से काफी नाराजगी और गुस्से का इज़हार किया गया था।

चांसलर एंजेला मर्केल ने भी वुल्फ के ही रास्ते पर चल रही हैं। लेकिन उनके आंतरिक मामलों के मंत्रालय की तरफ से उन्हें नीचे खींचा जा रहा है। जिसने रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक रूप से इस बात का इज़हार किया है कि इस्लाम जर्मनी का हिस्सा नहीं है।

यह सर्वे 1,000 जर्मन नागरिकों पर आधारित है। जिसे चुनाव संस्थान इन्फ्राटेस्ट डीमैप की तरफ से कराया गया। गौरतलब है, जर्मनी में शरणार्थियों के स्थानों पर पिछले साल करीब 1000 हमले हुए। जो 2014 की तुलना में पांच गुने हैं।