पंजाब सरकार को SC से झटका, सतलज-यमुना लिंक नहर पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

नई दिल्ली (17 मार्च) : सतलज-यमुना लिंक नहर को लेकर पंजाब सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में सतलज यमुना लिंक नहर में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 3 वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया है। अदालत की तरफ से नियुक्त ये अधिकारी हैं – केंद्रीय गृह सचिव, पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी। ये अधिकारी इस बात की निगरानी करेंगे कि नहर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल हो रहा है या नहीं।

बता दें कि हरियाणा सरकार ने नहर में मिट्टी भरे जाने और ज़मीन किसानों को लौटाने की शिकायत की थी। आज इस मामले पर 5 जजों की संविधान पीठ में सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने पंजाब की शिकायत की। हरियाणा के वकील ने बताया कि पंजाब विधानसभा ने एसवाईएल नहर को भरने और किसानों को ज़मीन लौटाने का कानून पास किया है। इसके बाद से अकाली दल के कार्यकर्ता और किसान नहर में मिट्टी भर के उसे समतल बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नहर में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया।  

पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे का विवाद 1966 में पंजाब से हरियाणा के अलग होने के बाद से ही चला आ रहा है। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दखल के बाद दोनोँ राज्यों में पानी के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ। समझौते के बाद पानी मिलने की उम्मीद में हरियाणा ने अपने इलाके में नहर बना लिया लेकिन पंजाब ने अपने इलाके में सतलज यमुना लिंक नहर का काम पूरा नहीं किया।

2004 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पंजाब में नहर का काम पूरा कराने को कहा तो पंजाब विधानसभा ने पानी समझौते को रद्द करने का प्रस्ताव पास कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के ज़रिये सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांगी कि क्या 2 राज्यों के बीच हुए समझौते को कोई राज्य एकतरफा खत्म कर सकता है. तब से ये मसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।