जानें, नए आर्मी चीफ बिपिन रावत से जुड़ी बड़ी बातें

नई दिल्ली(18 दिसंबर):  सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को देश का अगला थल सेना प्रमुख नियुक्त किया है। बिपिन रावत की नियुक्ति उनके दो वरिष्ठ अधिकारियों से आगे बढ़ाते हुए की गई है। वर्तमान सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

आइए जानते हैं लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत से जुड़ी बड़ी बातें...

1- बिपिन रावत ने भारतीय सेना दिसंबर 1978 में ज्वॉइन की थी। 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से ग्रेजुएशन किया इस दौरान उन्होंने वहां स्वोर्ड ऑफ ऑनर हासिल किया। इसके बाद वे गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन हुए।

2- लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। लेफ्टिनेंट जनरल रावत की पढ़ाई- लिखाई शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई।

3- वे गोरखा बटालियन से सेना प्रमुख बनने वाले लगातार दुसरे अफसर हैं। वतर्मान सेना प्रमुख दलबीर सिहं सुहाग भी गोरखा राइफल्स से हैं।4-  वाइस चीफ नियुक्त किए जाने से पहले रावत को पुणे स्थित दक्षिणी कमान का कमांडिंग ऑफिसर बनाया गया था। मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 रहे।

5- लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को ऊंची चोटियों की लड़ाई में महारत हासिल है। वे कश्मीर घाटी के मामलों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल रावत को काउंटर इंसर्जेंसी का विशेषज्ञ माना जाता है। कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और इंफैंट्री डिवीजन के वे कमांडिंग ऑफिसर रह चुके हैं।

6- लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में चमत्कारिक रुप से बच गए थे जब वे दीमापुर स्थित सेना मुख्यालय कोर 3 के कमांडर थे।

7- लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत 2008 में कांगों में यूएन के शांति मिशन को कमान संभाल चुके हैं। इस दौरान उनके द्वारा किए गए काम काफी सराहनीय रहे। यूनाइटेड नेशंस के साथ काम करते हुए भी उनको दो बार फोर्स कमांडर कमेंडेशन का अवार्ड दिया गया।

8 लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने मिलिट्री मीडिया स्ट्रेटजी स्टडीज में रिसर्च की जिसके लिए 2011 में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने उनको पीएचडी की उपाधि दी।

सरकार के सूत्रों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरलों में से लेफ्टिनेंट जनरल रावत को उत्तर में पुनर्गठित सैन्य बल, लगातार आतंकवाद एवं पश्चिम से छद्म युद्ध एवं पूर्वोत्तर में हालात समेत उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सर्वाधिक उचित पाया गया।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल रावत के पास पिछले तीन दशकों से भारतीय सेना में विभिन्न कार्यात्मक स्तरों पर एवं युद्ध क्षेत्रों में सेवाएं देने का बेहतरीन व्यावहारिक अनुभव है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा, चीन के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा एवं पूर्वोत्तर समेत कई इलाकों में परिचालन संबंधी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं।