ये यूनिवर्सिटी पढ़ा रही है- 'गांधी और तिलक सांप्रदायिक थे'

नई दिल्ली (18 मई): मुंबई यूनिवर्सिटी के एमए पॉलिटिकल साइंस की किताब में महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक को 'साम्प्रदायिक' और मुस्लिम लीग के जनक मोहम्मद अली जिन्ना को 'धर्मनिरपेक्ष' बताया गया है। डिस्टेंट एजुकेशन के कोर्स की किताब में लिखा कि है केवल वामपंथी कम्युनिस्ट दल ही वास्तव में सेक्युलर रहे हैं। बाकी राजनीतिक दलों ने साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया है।

महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायक संजय  ने इस किताब में जवाहरलाल नेहरु के योगदान की उपेक्षा पर सवाल उठाया है। इस किताब में वामपंथी नेताओं पर कई अध्याय हैं। उन्होंने महात्मा गांधी और तिलक को 'साम्प्रदायिक' बताने वाली किताब को तत्काल वापिस लेने की मांग उन्होंने की है। महात्मा गांधी के विषय में इस किताब में लिखा गया है कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि महात्मा गांधी राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े और हिन्दू प्रतीक चिह्नों और उदाहरणों ने जिन्ना को इतना चिढ़ा दिया कि उन्होंने कांग्रेस ही नहीं, भारत ही छोड़ दिया।

इसी संदर्भ में वे जिन्ना पर प्रशंसा की वर्षा की गई है। लिखा है- ये इतिहास की विसंगति है कि एक सच्चे राष्ट्रवादी और सेक्युलर नेता जिन्ना को गांधी के साथ अहम के टकराव की वजह से राष्ट्रीय आंदोलन छोड़ना पड़ा और उन्हें अंतत: मुसलमानों का कायदे-आजम बनना पड़ा,जिस नाते उन्हें उपमहाद्वीप छोड़ने और पाकिस्तान बनाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर किताब में टिप्पणियां हैं कि गणेशात्सव शु्रू करके और भगवत गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों को बढ़ावा देने की उनकी कार्रवाही और उनका रवैया साफ तौर पर साम्प्रदायिक था।'