जानिए कौन हैं महर्षि पतंजलि, दुनिया के लिए योग को बनाया आसान

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 21 जून ): अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आज दुनिया भर से योगाभ्यास के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून में योग कार्यक्रम में करीब 60 हजार लोगों के साथ बैठकर योग किया। यह योग सुबह 7:00 बजे से 7:45 तक फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) के प्रांगण में योग किया। वहीं कोटा मेंबाबा रामदेव ने 2 लाख लोगों के साथ योग किया। साथ विश्व रिकाॅर्ड बनाया। कोटा में बाबा रामदेव के साथ योग सत्र में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी हिस्सा लिया। गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज कराया है। आईए आज हम बताते हैं महर्षि पतंजलि पतंजलि के बारे में जिन्होंने दुनियाभर के लिए योग को आसान बनाया:जानें कौन हैं महर्षि पतंजलिमहर्षि पतंजलि संभवत: पुष्यमित्र शुंग (195-142 ई.पू.) के शासनकाल में थे। महर्षि पतंजलि की वजह से आज आपको योग का ज्ञान आसानी से प्राप्त है। महर्षि पतंजलि ने योग के 195 सूत्रों को इकट्ठा किया और अष्टांग योग का प्रतिपादन किया।कालांतर में महर्षि पतंजलि के प्रतिपादित 195 सूत्र योग दर्शन के स्तंभ माने गए। पतंजलि ही पहले और एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने योग को आस्था, अंधविश्वास और धर्म से बाहर निकालकर एक सुव्यवस्थित रूप दिया था।योग हिन्दू धर्म के छह दर्शनों में से एक है लेकिन इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। योग का ध्यान के साथ संयोजन होता है। बौद्ध धर्म में भी ध्यान के लिए अहम माना जाता है और ध्यान का संबंध इस्लाम और इसाई धर्म के साथ भी है। यह ग्रंथ अब तक हजारों भाषाओं में लिखा जा चुका है।महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग की महिमा को बताया, जो स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। महर्षि पतंजलि ने द्वितीय और तृतीय पाद में जिस अष्टांग योग साधन का उपदेश दिया है, उसके नाम इस प्रकार हैं- 1. यम, 2. नियम, 3. आसन, 4. प्राणायाम, 5. प्रत्याहार, 6. धारणा, 7. ध्यान और 8. समाधि. इन 8 अंगों के अपने-अपने उप अंग भी हैं. वर्तमान में योग के 3 ही अंग प्रचलन में हैं- आसन, प्राणायाम और ध्यान।महर्षि पतंजलि के जन्म के बारे में एक धार्मिक कहानी भी है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले की बात है, सभी ऋषि-मुनि भगवान विष्णु के पास पहुंचे और बोले, "भगवन्, आपने धन्वन्तरि का रूप ले कर शारीरिक रोगों के उपचार के लिए आयुर्वेद दिया, लेकिन अभी भी पृथ्वी पर लोग काम, क्रोध और मन की वासनाओं से पीड़ित हैं, इन सभी विकारों से मुक्ति का तरीका क्या है? अधिकतर लोग शारीरिक ही नहीं, मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी विकारों से दुखी होते हैं।"भगवान आदिशेष सर्प की शैया पर लेटे हुए थे। हज़ारों मुख वाले आदिशेष सर्प, जागरूकता के प्रतीक हैं। उन्होंने ऋषि मुनियों की प्रार्थना सुन, जागरूकता स्वरुप आदिशेष को महर्षि पतंजलि के रूप में पृथ्वी पर भेज दिया. इस तरह योग का ज्ञान प्रदान करने हेतु पृथ्वी पर महर्षि पतंजलि का अवतार हुआ।आज के दौर में ज्यादातर लोग योग सिर्फ शारीरिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए कर रहे हैं लेकिन योग की मदद से तन और मन दोनों को सुंदर बनाया जा सकता है।