महाराष्ट्र: मराठों को मिलेगा 16% आरक्षण, विधानसभा में बिल पास




न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (29 नवंबर): महाराष्ट्र सरकार ने विधानमंडल के दोनों सदनों में मराठा समुदाय के आरक्षण को लेकर बिल पेश किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा दांव खेलते हुए पिछड़ा आयोग की सिफारिश के आधार पर 16 प्रतिशत मराठा आरक्षण का बिल पेश किया, जो ध्वनिमत से पास हो गया। मराठा आरक्षण के लिए विशेष कैटेगरी SEBC बनाई गई है। महाराष्ट्र में 76 फीसदी मराठी खेती-किसानी और मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं। वहीं सिर्फ 6 फीसदी लोग सरकारी-अर्ध सरकारी नौकरी कर रहे हैं। गौरतलब है कि बुधवार को ही मराठा आरक्षण को लेकर विधानसभा स्‍पीकर ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।


बैठक में सीएम देवेंद्र फडणवीस, कैबिनेट की उप समिति सहित विपक्ष के सभी नेता मौजूद रहे। सरकार मराठा आरक्षण को लेकर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही थी. सदन में मराठा समाज के लिए रिपोर्ट और बिल ड्राफ्ट पर चर्चा भी हुई। इससे पहले विरोधी पार्टी के लोग मराठा आरक्षण पर आई रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने की मांग कर रहे थे। बता दें कि इस मुद्दे पर बुधवार शाम को राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिमंडल की उप समिति की बैठक हुई थी। पाटिल ने बुधवार को विधानसभा परिषद में कहा था कि विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरत पड़ने पर राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान कार्यक्रम के मुताबिक 19 नवंबर को मुंबई में शुरू हुआ शीतकालीन सत्र 30 नवंबर को समाप्त होगा।


बीते दिनों ही फडणवीस कैबिनेट द्वारा  मराठा आरक्षण के लिए बिल को मंज़ूरी देने के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि हमें पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट मिली थी, जिसमें तीन सिफारिशें की गई हैं। मराठा समुदाय को सोशल एंड इकनॉमिक बैकवर्ड कैटेगरी (SEBC) के तहत अलग से आरक्षण दिया जाएगा। हमने पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और इन पर अमल के लिए एक कैबिनेट सब कमिटी बनाई गई है।



1980 के दशक से लंबित पड़ी थी मांग
मराठों के आरक्षण की मांग 1980 के दशक से लंबित पड़ी थी।  राज्य पिछड़ा आयोग ने 25 विभिन्न मानकों पर मराठों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक आधार पर पिछड़ा होने की जांच की. इसमें से सभी मानकों पर मराठों की स्थिति दयनीय पाई गई। इस दौरान किए गए सर्वे में 43 हजार मराठा परिवारों की स्थिति जानी ग।  इसके अलावा जन सुनवाइयों में मिले करीब 2 करोड़ ज्ञापनों का भी अध्ययन किया गया।