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दिल्ली में तय होगी महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर, सोनिया-शरद पवार की मुलाकात आज

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच मंथन जारी है। इसी मुद्दे पर आज एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच शाम 4 बजे दिल्ली में बैठक होगी। इसके बाद महाराष्ट्र में सरकार बनने की तस्वीर साफ होने की उम्मीद की जा रही है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 नवंबर): महाराष्ट्र में नई सरकार की गठन पर अबतक सस्पेंस बना हुआ है। सब कुछ ठीक रहा तो आज दिल्ली में महाराष्ट्र की सियासी तस्वरी साफ हो सकती है। दिल्ली में आज एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात होने वाली है। दोनों नेता राज्य में सरकार के गठन पर चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद राज्य में सरकार गठन की गुत्थी सुलझ सकती है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस और एनसीपी पहले ही सरकार गठन के लिए शिवसेना के साथ एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर चर्चा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री पद के बंटवारे के मुद्दे पर बीजेपी और शिवसेना के बीच चली खींचतान के बाद राज्य में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। राज्य में सरकार गठन को लेकर शनिवार को शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी नेता राज्यपाल से मिलने वाले थे, लेकिन इस मुलाकात को भी टाल दिया गया था। बताया जा रहा है कि तीनों दलों के नेता राज्य में प्रशासनिक दिक्कतों और किसानों की समस्याओं को लेकर आज राज्यपाल से मिलने वाले थे।

 

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 12 नवंबर को एनसीपी प्रमुख शरद पवार से फोन पर बात की थी। इस बातचीत के बाद सोनिया ने पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल को मुंबई के दौरे पर भेजा था। इसके अलावा हाल ही में शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी के नेताओं के बीच मुंबई के ट्राइडेंट होटल में तीनों दलों के संयुक्त न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर बड़ी बैठक हुई थी। महाराष्ट्र में फिलहाल राष्ट्पति शासन लगा हुआ है। राज्य में 6 महीने या ज्यादा से ज्यादा 1 साल के लिए राष्ट्रपति शासन लागू रह सकता है। यदि एक साल से अधिक राष्ट्रपति शासन को आगे बढ़ाना है, तो इसके लिए केंद्रीय चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी। ऐसे में एक साल के बाद फिर से चुनाव की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सत्ताधारी बीजेपी और शिवसेना ने साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था। चुनाव नतीजों में बीजेपी 105 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, वहीं शिवसेना 56 सीटें पाकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं एनसीपी और कांग्रेस के खाते में 54 और 44 सीटें आईं। चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना और बीजेपी के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान शुरू हो गई। शिवसेना 50-50 फॉर्मूले पर अड़ गई और बीजेपी के सीएम की कुर्सी देने को तैयार नहीं थी। इसके बाद 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया और अब शिवसेना तीसरे और चौथे स्थान की पार्टी एनसीपी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है।

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