भगवान पर नहीं दिखा नोटबंदी का असर, रथ को 56 लाख नए नोटों से सजाया

रोहित बुतकर, सतारा (29 दिसंबर): नोटबंदी के चलते बैंक और एटीएम के बाहर भले ही अब भी लाइन लगती हो। नोट से लेकर छुट्टे तक की परेशानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हो। लेकिन अब भी कई मौकों पर नोटों की बारिश हो रही है। महाराष्ट्र के सतारा में एक रथयात्रा निकली, इसमें रथ नोटों से ही सजा था।

नोटबंदी के दौर में महाराष्ट्र के सतारा जिले के पुसेगांव में निकाली रथ यात्रा में चारों तरफ नोट ही नोट दिखाई पड़ रहे थे। पूरा रथ नोटों की मालाओं से सजा था। 10 रुपये के नोट, 20 रुपये के नोट, 100 रुपये के नोट, 500 के नए नोट और 2000 के नए नोट इन मालाओं की शोभा बढ़ा रहे हैं। यही नहीं इस रथयात्रा में चढ़ावे के तौर पर विदेशी करेंसी भी खूब मिले।

रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं ने खूब मेहनत की। चढ़ावे लेने से लेकर उसकी गिनती और मालाओं में नोटों को गूंथने का काम किया और जब रथयात्रा निकली तो भक्तों की खुशी देखते ही बन रही थी। नोटबंदी के चलते लोग बैंक और एटीएम से पैसा निकालने से लेकर छुट्टे तक की परेशानी से भले ही अभी तक जूझ रहे हों मगर इस रथयात्रा पर इसका कोई असर नजर नहीं आया।

भक्तों ने दिल खोलकर सेवागिरी महाराज की निकाली जाने वाली इस रथयात्रा में नोटों की बारिश की है। लेकिन सेवागिरी ट्रस्ट की मानें तो इस साल नोटबंदी का असर पड़ा है। पिछले साल जहां 56 लाख रुपये मिले थे, वहीं इस बार 50 लाख 79 हजार ही आए। सातारा के पुसेगांव इलाके में सेवागिरी महाराज का मठ है। महाराज को नाथ संप्रदाय का अनुयायी मान जाता है। उनके गुजर जाने के बाद उनकी याद में हर साल रथ यात्रा निकाली जाती है। यहां की परंपरा के मुताबिक भक्त रथ को नोटों की मालाओं से भर देते हैं। इस साल नोटबंदी के बाद भी भक्तों

ने इस रथयात्रा में कंजूसी नहीं दिखाई।

सतारा का पुसेगांव सूखाग्रस्त है। सेवागिरी ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि इस रथयात्रा के चढ़ावे से जनसेवा के काम किए जाते हैं। ये रथयात्रा महाराष्ट्र की सबसे बड़ी यात्रा मानी जाती है। इसमें महाराष्ट्र के अलावा आंध्र प्रदेश और कर्णाटक के भक्त भी शामिल होते हैं। इस साल करीब दस लाख श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। सबने दिल खोलकर नोट चढ़ाए।