साधक के मन में निवास करती है अष्टम महागौरी

नई दिल्ली (9 अक्टूबर): नवरात्र की अष्टमी में साधक की कुण्डलनी जागृत हो जाती है। नवरात्र अष्टमी तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए सर्वाधिक शक्ति अर्जित करने वाली कही गयी है। अष्टमी की रात्रि को “चेतन रात्रि” भी कहा गया है। शास्त्रों में नवरात्र अष्टमी तिथि का अत्यंत महत्व बताया गया है। सिद्धि प्राप्त साधक अष्टमी में देवी का साक्षात्कार भी कर पाते हैं। इनकी पूजा अर्चना से समस्त कष्ट दूर होते हैं तथा अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। योगिक दृष्टिकोण से मानव शरीर में देवी महागौरी का स्थान व्यक्ति का मन है।