मदरसों में उर्दू-अरबी माध्यम में शिक्षा देना बंद हो : शिवसेना

नई दिल्ली (20 जनवरी): शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिटिश सरकार की उस 'चेतावनी' से संकेत लेने के लिए कहा है, जिसमें कहा गया कि वैवाहिक वीजा पर ब्रिटेन आने वाले उन प्रवासियों को निर्वासित किया जा सकता है, जिनकी अंग्रेजी कमजोर है। शिवसेना ने बुधवार को कहा कि भारत के मदरसों में भी शिक्षा के लिए उर्दू और अरबी माध्यम के इस्तेमाल की जगह अंग्रेजी और हिंदी माध्यम को स्थान दिया जाना चाहिए।    

'मिड-डे' की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के सहयोगी दल शिवसेना ने पीएम और उनके साथी मंत्रियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह दूसरे देशों में घूमकर देश में निवेश को भले ही बढ़ाने में सफल हो सकते हैं, लेकिन वे अपने देश में ही मौजूद 'दुश्मनों' से लड़ने के लिए हिम्मत कहां से लाएंगे?

शिवसेना ने कहा कि सरकार को हिम्मत दिखाना चाहिए और यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना चाहिए। साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू करना चाहिए। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में कहा, ''ब्रिटिश सरकार गलत नहीं सोच रही है, कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी अशिक्षित मुस्लिम महिलाओं का इस्तेमाल अपने विचारों के प्रचार प्रसार के लिए करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिटिश सरकार से संकेत लेने चाहिए।''

सामना में शिवसेना ने कहा, "अगर सरकार ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की तरह ही हिम्मत दिखा सकती है और मदरसों को अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में शिक्षा देने के लिए उर्दू और अरबी भाषाओं में शिक्षा देने से रोकती है, तो भारत को फायदा होगा।"

गौरतलब है, ब्रिटिश सरकार ने हाल ही में चेतावनी दी है कि वैवाहिक वीजा पर आने वाले प्रवासियों को अंग्रेजी ना बोल पाने की स्थिति में निर्वासित किया जा सकता है। इसके लिए, सरकार ने प्रवासी मुस्लिम महिलाओं के भाषा कौशल को सुधारने के लिए 20 मिलियन पाउंड्स के फंड की घोषणा की है। 

शिवसेना ने सवाल किया, ''ना केवल हमारे प्रधानमंत्री बल्कि राजनेता लगातार विदेशों की यात्रा करते रहे हैं, साथ ही उद्योग, व्यापार, टैलेंट, संस्कृति को भारत में लाने की बात करते हैं। हम बिल्कुल ही इसमें सफल होंगे, लेकिन हम अपने ही देश के भीतर दुश्मनों से लड़ने के लिए हिम्मत कहां से लाएंगे?''

कैमरन ने मंगलवार को मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के बीच छंटनी करने के लिए अंग्रेजी भाषा की कठोर जरूरत के लिए योजना का खुलासा किया। नए नियमों के मुताबिक, इस साल अक्टूबर से ब्रिटेन में पांच साल के वैवाहिक वीजा पर आने वाले अंग्रेजी में कमजोर प्रवासियों का ढ़ाई साल में टेस्ट लिया जाएगा, जिसमें ये देखा जाएगा कि वे अंग्रेजी सुधारने के लिए कोशिश कर रहे हैं या नहीं।