मदरसों का 'हिंदू संस्थाओं' से मिड डे मील लेने से इनकार

नई दिल्ली(6 अगस्त): उज्जैन में 39 मदरसों ने मिड-डे मील के तहत आने वाले खाने को खाने से इंकार कर दिया है। उनका मानना है कि उनके धार्मिक विश्वास को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। इन मदरसों में खाना 2010 से इस्कॉन मंदिर पहुंचा रहा है। शहर के सारे स्कूलों में मिड-डे मील इस्कॉन मंदिर ही पहुंचाता आ रहा है।

- मदरसा के प्रशासन ने इस्कॉन मंदिर से अब खाना लेने से मना कर दिया है। मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों के परिजनों का मानना है कि मदरसे में जो खाना पहुंचाने से पहले उसका हिंदू भगवानों को भोग लगाया जाता है।

- इस्कॉन से जुड़े ट्रस्ट का टेंडर इस साल जुलाई में खत्म हो गया था। जिसके बाद मिड-डे मील का खाना पहुंचाने के लिए दूसरे सप्लायर्स बीआरके फूड्स और मां पार्वती फूड्स ने खाना पहुंचाना शुरू किया लेकिन मदरसा प्रशासन ने उनसे भी खाना लेने से मना कर दिया। बीआरके शहर के 315 स्कूलों में मिड-डे मील पहुंचाता है। जिनमें से 56 मदरसों ने अब खाना लेने से मना कर दिया। परिजनों को इन सप्लायर्स से आ रहे खाने से समस्या है उनका कहना है कि वो अपने बच्चों को मदरसों से निकाल लेंगे अगर इन जगहों से खाना आता रहा।

- परिजनों की मांग है कि खाना बाहर से आने की बजाय मदरसों में ही पकाया जाए। हालांकि प्रशासन ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा है कि मदरसों के बच्चों को अलग तरह का खाना खाने की आदत है इसलिए उन्होंने मना किया है।