यहां कृष्ण भगवान को 'सलामी' देकर आगे बढ़ता है ताजिया

नई दिल्ली(13 अक्टूबर): देश में सांप्रदायिक दंगों के कई किस्से सुने होंगे आप, लेकिन कुछ ऐसे भीउदाहरण हैं जिन्होंने प्रेम और सौहार्द की लौ जगाए रखी है। 

- मध्यप्रदेश के भांदर में ताजिया का जुलूस कुछ समय के लिए ही सही, पर कृष्ण मंदिर के सामने रुकता जरूर है। इस चतुर्भुज कृष्ण मंदिर का निर्माण भी एक मुस्लिम ने ही करवाया था।

- 200 सालों से, जब से यह मंदिर बना है, ताजिया चतुर्भुज महाराज (कृष्ण भगवान) मंदिर के सामने रुकता है और सलामी देकर आगे बढ़ता है। ऐसा इस बुधवार को मुहर्रम के दिन भी हुआ। यही प्रथा तब भी निभाई जाती है जब कृष्ण की 'सवारी' निकलती है। यह जरूरी होता है कि हर परिवार का कम से कम एक सदस्य चतुर्भुज महाराज की सवारी को कंधे पर उठाए।

- लोकल ताजिया कमिटी के अध्यक्ष अब्दुल जबर बताते हैं कि यह सालों से चला आ रहा रिवाज है। इस शहर में लगभग 40 ताजिए बनते हैं और सभी पहले कृष्ण मंदिर के सामने कुछ सेकंड रुककर सलामी देते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं।

- मंदिर के पुजारी रमेश पांडा ने बताया कि यह मंदिर हजारी नाम के एक स्थानीय मुस्लिम ने बनवाया था। ऐसा कहा जाता है कि हजारी ने सपने में चतुर्भुज भगवान को देखा था। भगवान ने उनसे कहा कि मैं एक तालाब के आस-पास हूं। सुबह जब वह पास के तालाब में गया तो कृष्ण की मूर्ति को देखकर हैरान रह गया। इस मूर्ति का वजन 4 टन था। वह किसी भी तरह से मूर्ति को अपने घर तक लेकर आया। इस घटना के कुछ दिन बाद फिर से हजारी को सपने में चतुर्भुज महाराज के दर्शन हुए उन्होंने कहा कि उन्हें घर में न रखा जाए। हजारी ने तुरंत मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया।